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एनएच-205 की बदहाल स्थिति पर नाराजगी, विधिक सेवा प्राधिकरण को निरीक्षण के निर्देश

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग 205 की खस्ता हालत पर सोलन और बिलासपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सचिवों को सड़क के संबंधित हिस्से का निरीक्षण करने और अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (विधिक सेवा प्राधिकरण) को निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट में तस्वीरें भी शामिल होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान उन्हें यह राय भी देनी होगी कि क्या सड़क पर कोई जलधारा बह रही है, जिसके कारण अन्य हिस्सों से शिमला की ओर आ रहे भारी यातायात के चलते सड़क पूरी तरह से नष्ट हो रही है।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया है। कोर्ट ने शिमला से दाड़लाघाट और बिलासपुर में सड़क के कुछ हिस्सों के रखरखाव की खराब स्थिति पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत को बताया गया कि यह राजमार्ग शिमला को बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, सोलन, लाहौल स्पीति, मंडी, ऊना आदि जिलों से जोड़ने वाली जीवनरेखा है

दाड़लाघाट से भराड़ीघाट तक का खंड पीआईयू शिमला के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके अलावा, शिमला बैरियर से टुटू तक का खंड भी बहुत दयनीय स्थिति में है। इसके चलते अदालत ने प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट (पीआईयू) शिमला को अगली सुनवाई से पहले एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। अदालत को बताया गया कि दाड़लाघाट से बिलासपुर तक का यह स्ट्रेच जिला सोलन और जिला बिलासपुर के अंतर्गत आता है और यह भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पीआईयू हमीरपुर के नियंत्रण में है।

एनएचएआई, पीआईयू, हमीरपुर के परियोजना निदेशक की ओर से दायर हलफनामे में बताया गया है कि उच्च मानकों को बनाए रखने की कानूनी जिम्मेदारी गावर कंपनी की है। भराड़ीघाट से नम्होल तक के खंड के रखरखाव का दायित्व इसी का ही है। गावर कंपनी की ओर से हलफनामे में स्वीकार किया गया है कि रियायत समझौते के अनुसार कलर बाला से नौणी चौक खंड तक सड़क को गड्ढा मुक्त बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। प्रतिवादी कंपनी ने दावा किया कि सेवा की गुणवत्ता और सड़क सुरक्षा को बनाए रखा जा रहा है। हालांकि, न्यायालय ने कंपनी के इन दावों से असहमति जताई।

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