

हिमाचल में स्वास्थ्य चिकित्सा सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए अब सरकार केरल का मॉडल अपनाएगी। इस मॉडल के अनुसार अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीज घर बैठे पर्ची बना सकेंगे। इससे मरीजों को अस्पताल में लाइन में खड़े रहने से छुटकारा मिलेगा। देश में केरल की चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर माना गया है। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार की ओर से नियम 130 के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं पर लाए गए प्रस्ताव के जवाब में दी यह जानकारी दी
हिमाचल के तीन मेडिकल काॅलेजों शिमला, टांडा (कांगड़ा) और हमीरपुर में ऑटो डायग्नोसिस लैब स्थापित की जाएगी। इससे मरीजों को निजी लैब पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 24 घंटे इन लैब में टेस्ट होंगे। जांच में स्टीक जानकारी से डॉक्टर आसानी से बीमारी का पता लगा सकेंगे। मंत्री ने कहा कि प्रदेश के आदर्श अस्पतालों में 45 करोड़ की लागत से डायलिसिस मशीनें लगेंगे, जिससे मरीजों को मेडिकल कॉलेजों या निजी अस्पतालाें में नहीं आना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल के सभी अस्पताल में हिमकेयर, आयुष्मान और सहारा योजना जारी है। अगर किसी को योजना के तहत उपचार नहीं मिल रहा है तो वह मुझे फोन पर सूचित कर सकता है।
मंत्री शांडिल ने कहा कि आईजीएमसी में सितंबर के पहले सप्ताह पेट स्कैन मशीन स्थापित होगी। आईजीएमसी, टांडा और नेरचौक मेडिकल कॉलेज में एमआरआई 3 टेस्ला मशीन स्थापित की जा रही हैं। 32 आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों में भी पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन मशीन स्थापित होंगी। टांडा में एक और एक्सरे मशीन लगेगी। उन्होंने सदन में बताया कि नाहन मेडिकल कॉलेज का वह स्वयं निरीक्षण करेंगे। यहां जो भी समस्याएं होंगी, उन्हें मौके पर निपटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 8 से 10 आदर्श अस्पतालों को छोड़कर अन्य में छह-छह स्पेशलिस्ट डॉक्टर तैनात कर दिए हैं। इन अस्पताल में मरीजों के अल्सर सहित अन्य ऑपरेशन किए जा रहे हैं।







