

शिक्षा विभाग में पदोन्नत होने के एक सप्ताह में पद ग्रहण नहीं करने की स्थिति में आदेश रद्द किए जाएंगे। मंगलवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में प्रवक्ता बने 642 टीजीटी के मामले में चर्चा करने के बाद यह फैसला लिया गया है। शिक्षा मंत्री ने स्कूलों के औचक निरीक्षण के निर्देश देते हुए कहा कि जिन शिक्षकों का काम संतोषजनक नहीं होगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। छात्र नामांकन के आधार पर सख्ती से विज्ञान शिक्षकों और अन्य पीजीटी के पदों का युक्तिकरण करने का निर्णय भी बैठक में लिया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड उन छात्रों को बिना किसी शुल्क के प्रमाण-पत्र की प्रतिलिपि जारी करेगा जिनके दस्तावेज आपदा के कारण नष्ट हो गए हैं।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो प्रवक्ता 18 सितंबर तक कार्यभार ग्रहण नहीं करेंगे, उनकी पदोन्नति रद्द कर दी जाएगी और यह अवसर अगले पात्र उम्मीदवारों को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग में अनुशासन और जवाबदेही से समझौता नहीं किया जा सकता। अनुशासनहीनता और अनुपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उप-निदेशकों को निदेशालय स्तर पर उचित अवकाश आवेदन प्रस्तुत करने होंगे। उन्होंने उप-निदेशकों को अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बैठक में निर्णय लिया गया कि विज्ञान शिक्षकों और अन्य प्रवक्ता पदों का युक्तिकरण छात्र संख्या के आधार पर किया जाएगा।
निर्देश दिया कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम तीन से चार स्कूलों में सभी शैक्षणिक संकायों के विकल्प के साथ पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध होने चाहिए। अनावश्यक प्रतिनियुक्तियां रद्द की जानी चाहिए। उन्होंने विज्ञान पाठ्यक्रम में घटते नामांकन पर चिंता व्यक्त की और निर्देश दिए कि अधिक से अधिक छात्रों को विज्ञान विषय चुनने के लिए प्रोत्साहित करने के दृष्टिगत सुविधाओं में सुधार किया जाना चाहिए। सभी जिला उपनिदेशकों को स्कूल निरीक्षण लक्ष्य समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए। इस दौरान जिन शिक्षकों का प्रदर्शन असंतोषजनक पाया जाएगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्कूल शिक्षा निदेशालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के सचिव मेजर विशाल शर्मा, निदेशक शिक्षा आशीष कोहली तथा अतिरिक्त निदेशक शिक्षा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि पॉक्सो मामलों, धन की हेराफेरी और नशे की हालत में पाए जाने वाले शिक्षकों/अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। निर्देश दिए गए कि प्रवक्ता (स्कूल न्यू) कक्षा 6वीं से 10वीं तक पढ़ाने के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करें। अगली बैठक में प्रत्येक जिला उपनिदेशक को पांच ऐसे स्कूलों की प्रस्तुति देनी होगी जहां यह व्यवस्था लागू हो चुकी है। बैठक में विभिन्न विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां भी दी गईं। नैंसी ने परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स, यादविंद्र ने यू-डाइस प्लस, माया ने डिजिटल उपस्थिति प्रणाली, नंदिनी ने एक पेड़ मां के नाम अभियान को लेकर प्रस्तुति दी। बैठक में जिला स्तर पर इंस्पायर मानक योजना के नामांकन की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
बैठक में हाल ही में भारी वर्षा व प्राकृतिक आपदाओं से विभाग को हुए नुकसान और स्कूल भवनों को हुई क्षति की समीक्षा की गई। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को छात्रों की सुरक्षा और उनकी पढ़ाई निर्बाध जारी रखने पर विशेष बल देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षतिग्रस्त स्कूलों के लिए भवन किराए पर लेने की सुविधा भी प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से अब तक 1,125 शैक्षणिक संस्थान प्रभावित हुए हैं और अनुमानित 59.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
वर्ष 2023 में 646 स्कूलों में आपदा संबंधी मरम्मत के लिए 51.13 करोड़ रुपये जारी किए गए जबकि वर्ष 2025 सितंबर में अब तक 77 स्कूलों के लिए 13.22 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। मंडी जिला को वर्ष 2023 से सितंबर 2025 तक सबसे अधिक 16.19 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि आपदा पश्चात आवश्यकता मूल्यांकन (पीडीएनए) के तहत प्राप्त धनराशि का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए, और 75 प्रतिशत से अधिक क्षति वाले स्कूलों को प्राथमिकता दी जाए। धनराशि के उपयोग की रिपोर्ट पांच दिनों के भीतर प्रस्तुत की जानी चाहिए, अन्यथा उपयोग नहीं की गई राशि तत्काल आवश्यकता वाले अन्य संस्थानों को दे दी जाएगी।







