

श्रीखंड के पास 13 अगस्त को नंदी खड्ड में बादल फटने से गानवी में जो नुकसान हुआ था, उसके जख्म अभी भी हरे हैं। कई लोग बेघर हो चुके हैं, जमीनें बह गईं, लेकिन प्रभावितों को मुआवजा नहीं मिला। गानवी समेत छह पंचायतें डेढ़ माह से अलग-थलग हैं। लोगों के जख्मों पर अब तक न प्रशासन और न बिजली बोर्ड मरहम लगा पाया है।
गानवी खड्ड पर बिजली बोर्ड ने जो लोहे का पुल बनाया था, वह टूट चुका है। रामपुर की तरफ से गानवी से करीब 400-500 मीटर पीछे सड़क पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इससे छह पंचायतों का सड़क संपर्क अब तक जुड़ नहीं पाया। स्थानीय लोगों में बिजली बोर्ड के गानवी पावर प्रोजेक्ट प्रबंधन के प्रति गुस्सा है। लोगों का कहना है कि जो ढांचे ध्वस्त हुए हैं, उनको दुरुस्त करने में बोर्ड ने अब तक कोई रुचि नहीं दिखाई। गानवी में पावर प्रोजेक्ट का इनटेक गेट है। भारी मात्रा में पानी और बड़े-बड़े पत्थर आने से खड्ड ने अपना रास्ता बदलकर लोगों के घर, जमीन, बस स्टैंड, कई दुकानें, रेन शेल्टर सब तहस-नहस कर दिया। पावर प्रोजेक्ट प्रबंधन और जिला प्रशासन अभी तक मात्र पत्थर-मलबा हटाकर खड्ड को पुराने रास्ते पर ही ला पाया है। इसके अलावा और कोई काम शुरू नहीं किया।
लोगों ने उफनती खड्ड पार करने के लिए लकड़ी के तख्तों की अस्थायी पुलिया बनाई है। इससे हरदम हादसे की आशंका है। गानवी, लवाना सदाना, फांचा, जगोरी, क्याओ, कूट छह पंचायतों के लोग इसी पुलिया को पार कर आ-जा रहे हैं। लोगों ने बताया कि पावर प्रोजेक्ट प्रबंधन ने 17 सितंबर से काम शुरू करने के लिए कहा था, लेकिन अब तक खड्ड में बड़े-बड़े पत्थर जो पानी के तेज बहाव के साथ बहकर आए थे, वे भी नहीं हटाए। खड्ड का लेबल गांव के बराबर पहुंच गया है। स्थानीय ग्रामीण गोपाल सिंह बंसल ने कहा कि जीवानंद, दौलत राम, गीता राम, जोबन दास, सुरेश और कालू राम की जमीनें बह गईं, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। फूला सिंह कहते हैं कि लोगों के घर क्षतिग्रस्त हो गए, उन्हें भी कोई मदद आज तक नहीं मिली। सुमित मिल्टू ने बताया कि बिजली परियोजना प्रबंधन ने खड्ड से पत्थर निकालने के लिए मात्र एक जेसीबी लगाई है, जो नाकाफी है।
लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन शक्ति नेगी ने बताया कि विभाग के पास रामपुर से गानवी खड्ड से पीछे तक का क्षेत्र है। यहां जो सड़क ध्वस्त हुई है, उसे छोटे वाहनों के लिए जल्द बहाल करेंगे। नीचे गानवी खड्ड बह रही है। पूरी सड़क ध्वस्त हो चुकी है। जो जगह है, वह दलदल है। सर्दियों में मिट्टी सख्त होगी तभी काम हो सकेगा। गानवी से डेढ़ किलोमीटर आगे क्याओ तक की सड़क का जिम्मा पावर प्रोजेक्ट प्रबंधन के पास है। शक्ति नेगी ने कहा कि जहां सड़क ध्वस्त हुई है, उससे पीछे नया रूट ज्यूरी से टर्न कर बनाने के लिए सर्वे किया जा रहा है, क्योंकि यहां हर बार बरसात में सड़क टूटती है।
वहीं, बिजली बोर्ड के गानवी पावर प्रोजेक्ट के एक्सईएन आशुतोष ठाकुर के अनुसार तीन-चार माह पहले लाडा की बैठक में प्रोजेक्ट प्रबंधन ने कहा था कि उनके लिए सड़क का जिम्मा संभालना मुश्किल है। इसलिए पीडब्ल्यूडी इसे अपने पास ले। विभाग के उच्चाधिकारियों से मंजूरी मिल गई है। तहसीलदार को पत्र लिखा है कि पीडब्ल्यूडी को गिफ्ट डीड दी जाए। आशुतोष ने बताया कि खड्ड को पूरी तरह पुराने रास्ते पर लाना है। बस स्टैंड से प्रोजेक्ट की कॉलोनी तक काम करवाएंगे। ट्रेंच बेयर से गानवी तक करीब डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में खड्ड का तटीकरण करना है। इसके लिए करोड़ों रुपये चाहिए। पुल बनाने के लिए विभाग के उच्च अधिकारियों से बात चल रही है।
रामपुर के एसडीएम हर्ष अमरेंद्र सिंह ने बताया कि शराब के ठेके के साथ जो पांच-छह इमारतों को नुकसान हुआ था, उसकी रिपोर्ट पटवारी ने दे दी है। लोगों से कहा था कि मुआवजे के लिए ऑनलाइन आवेदन करें। लोग आवेदन नहीं कर रहे। उन्हें आशंका है कि अभी आवेदन किया तो उन्हें 1.30 लाख रुपये ही प्रशासन देगा, जबकि सरकार ने सात लाख रुपये देने की बात कही है। एसडीएम ने कहा कि लोग इस दुविधा में न रहें और ऑनलाइन आवेदन करें। जो सरकार ने तय किया है, वह उनको मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों की जमीनों से मलबा तो हटा दिया था, लेकिन घरों के अंदर मलबा निकालने का प्रावधान नहीं है। पिछले साल 31 अगस्त को भी यहां बाढ़ आई थी, तब भी घरों को नुकसान हुआ था। उस समय लोगों को मुआवजा दिया गया है, लेकिन कुछ लोगों ने फिर वहीं निर्माण कार्य कर दिया। इसलिए इस बार फिर नुकसान हुआ। ऐसे नुकसान का मुआवजा दोबारा नहीं दे सकते।
गानवी से 20 किलोमीटर आगे कूट (रोपड़ी) की रहने वाली रवीना की शादी इसी माह 30 सितंबर को है। सड़क पूरी तरह ध्वस्त होने और दूसरी ओर सड़क तक सामान ले जाने के लिए स्थापित स्पैन को चलाने वाला कोई न होने के कारण रवीना को अपनी शादी के लिए सामान खुद सिर पर ढोना पड़ा। उसकी मदद के लिए उसकी सहेलियां अदिति, शिक्षा और नताशा भी पहुंची थीं।
एचआरटीसी के रामपुर-गानवी रूट पर चलने वाले चालक एम चंद और परिचालक मंगत राम ने बताया कि डेढ़ माह से एक बस गानवी से पांच किमी दूर लबाना सदाना और दूसरी 25 किलोमीटर दूर किनफी में फंसी है।






