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चिट्टे ने एक दंपती का आठ साल का वैवाहिक जीवन बरबाद कर दिया,पति ने चिट्टे की लत के लिए बेच दिए पत्नी के गहने, घर से निकाला

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चिट्टे ने एक दंपती का आठ साल का वैवाहिक जीवन बरबाद कर दिया। आरोप है कि चिट्टे का आदी पति शादी के कुछ समय बाद पत्नी से मारपीट करने लगा।

चिट्टा (हेरोइन) की लत किस तरह परिवारों को तबाह कर रही है। इसका एक और मामला हिमाचल प्रदेश के रामपुर क्षेत्र में सामने आया है। चिट्टे ने एक दंपती का आठ साल का वैवाहिक जीवन बरबाद कर दिया। आरोप है कि चिट्टे का आदी पति शादी के कुछ समय बाद पत्नी से मारपीट करने लगा। पत्नी शादी को बचाने के लिए इस व्यवहार को इस उम्मीद से सहन करती रही कि भविष्य में वह खुद को सुधार लेगा। इस बीच पति ने नशा खरीदने के लिए पत्नी के गहने भी बेच दिए। फिर एक दिन मारपीट करके पत्नी को घर से बाहर निकाल दिया।

इस पर पत्नी ने घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया। फिर भी पति में कोई सुधार नहीं हुआ। अंत में प्रताड़ना से दुखी पत्नी ने तलाक के लिए अदालत में याचिका दायर कर दी। अदालत ने महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से तलाक को मंजूरी दे दी है। मामला उपमंडल रामपुर की ननखड़ी तहसील का है। शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। विवाह के तुरंत बाद पति ने चिट्टे की लत में किसी न किसी बहाने पत्नी के साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया।

एक दिन उसने नशे की लत को पूरा करने के लिए चुपके से पत्नी के गहने ले लिए और उन्हें बेचकर नशा खरीद लिया। पति नशे के प्रभाव में अकसर बिना किसी कारण के पत्नी को मारता-पीटता। यह भी आरोप है कि 2020 में पति ने नशे में पत्नी को बुरी तरह पीटा और उसे घर से निकाल दिया।  धमकी दी कि यदि ससुराल वापस आई तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके बाद पत्नी ने घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई। वह मामला भी अदालत में निर्णय के लिए लंबित है। इस साल महिला ने रामपुर स्थित पारिवारिक न्यायालय किन्नौर में तलाक के लिए याचिका दायर की।

अदालत ने याचिका दायर होने के बाद पति को उसके पिता के माध्यम से नियमानुसार अवगत कराया। बावजूद उसके न तो वह और न ही उसकी ओर से कोई अदालत में उपस्थित हुआ। इसके बाद अदालत की ओर से एक पक्षीय कार्यवाही की गई। अदालत ने फैसले में बताया कि याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों के अवलोकन से साबित होता है कि प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता के साथ क्रूरता से व्यवहार किया है और उसे जानबूझकर छोड़ दिया है। याचिका को उल्लिखित आधारों पर स्वीकार किया जाता है। याचिकाकर्ता और प्रतिवादी के विवाह को तत्काल प्रभाव से विघटित किया जाता है।

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