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रोहड़ू दलित बच्चे की आत्महत्या मामला, हाईकोर्ट ने नहीं दी अग्रिम जमानत, कहा- मामला गंभीर

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रोहड़ू उपमंडल में 12 वर्षीय बच्चे की आत्महत्या मामले में मुख्य आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि एससी-एसटी एक्ट की धारा-18 के नियमों के चलते यह जमानत वैध नहीं है। पढ़ें पूरी खबर...

हाईकोर्ट ने शिमला जिला के रोहड़ू उपमंडल में 12 वर्षीय बच्चे की आत्महत्या मामले में मुख्य आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि एससी-एसटी एक्ट की धारा-18 के नियमों के चलते यह जमानत वैध नहीं है। जस्टिस राकेश कैंथला की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। अब इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी भी हो सकती है। यह मामला चिड़गांव थाना क्षेत्र के लिम्बड़ा गांव का है। 16 सितंबर को 12 वर्षीय बच्चे ने आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने पहले 18 सितंबर को भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 107, 127(2), 115(2) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया था। बाद में छुआछूत और जातिगत अत्याचार सामने आने पर एससी-एसटी एक्ट जोड़ दिया गया।

इस मामले में बच्चे की मां ने आरोप लगाया था कि गांव की तीन महिलाओं ने उसके बेटे को बेहरमी से पीटकर गोशाला में बंद कर दिया था। इस घटना से आहत होकर उसने जहर निगल लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। हालांकि, इस मामले में आरोपी को पहले हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी थी, लेकिन बाद में एससी-एसटी की एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज होने के पर यह मामला फिर से हाईकोर्ट में विचाराधीन था। मंगलवार को हिमाचल हाईकोर्ट ने आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत को खारिज कर दी। वहीं, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले बच्चे को घर को छूने पर बुरी तरह से यातनाएं दीं। इसके चलते उसने आत्महत्या कर ली। आरोप है कि बच्चे ने गांव की एक महिला पुष्पा देवी के घर को छुआ था।

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