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गेंदबाजी छोड़ना पड़ा महंगा—फाइनल में हरलीन को नहीं मिला मौका, अमनजोत को मिली जगह

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Harleen Deol: Harleen Deol: हिमाचल प्रदेश की बेटी हरलीन देओल का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन गेंदबाजी छोड़ना उनके लिए फाइनल मुकाबले में भारी पड़ गया। पढ़ें पूरी खबर...

महिला वनडे क्रिकेट विश्वकप की विजेता बनी भारतीय महिला टीम में हिमाचल प्रदेश की बेटी हरलीन देओल का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन गेंदबाजी छोड़ना उनके लिए फाइनल मुकाबले में भारी पड़ गया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए फाइनल मैच में हिमाचल से केवल रेणुका सिंह ठाकुर को ही प्लेइंग इलेवन में मौका मिला। उन्होंने अपनी किफायती गेंदबाजी से भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, हरलीन को इस अहम मुकाबले में टीम संयोजन के कारण बाहर बैठना पड़ा।

सूत्रों के अनुसार, हरलीन देओल ने पिछले तीन वर्षों से गेंदबाजी करना लगभग बंद कर दिया था और वे मुख्य रूप से बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित कर रही थीं। इसी वजह से चयनकर्ताओं ने फाइनल में उन्हें आलराउंडर के रूप में जगह नहीं दी और अमनजोत कौर को प्राथमिकता दी गई। हरलीन ने टूर्नामेंट के दौरान पांच मैचों में 150 से अधिक रन बनाकर टीम में योगदान दिया। हालांकि फाइनल में उन्हें केवल सब्सटीट्यूट फील्डर के रूप में मैदान में उतरने का मौका मिला। यदि वे बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी भी जारी रखतीं, तो उनका फाइनल में खेलना लगभग तय माना जा रहा था।

हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ (एचपीसीए) ने भारतीय महिला टीम को वनडे विश्वकप जीतने पर बधाई दी है। संघ के सचिव अवनीश परमार ने कहा कि विश्वकप में प्रदेश की बेटियों को खेलते देखना गौरव का क्षण रहा। उन्होंने कहा कि एचपीसीए में प्रशिक्षण प्राप्त कर देश के लिए खेलते हुए दोनों खिलाड़ियों ने पहली बार विश्वकप जीतकर इतिहास रचा है। एचपीसीए ने हरलीन देओल और रेणुका सिंह ठाकुर को विशेष बधाई दी है और बताया कि उन्हें जल्द ही सम्मानित किया जाएगा।

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