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हाईकोर्ट में आज बड़ा दिन—JBT भर्ती विवाद का रिकॉर्ड पेश करेगी हिमाचल सरकार

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पिछले आदेश में जेबीटी शिक्षकें के चयन से जुड़ा रिकॉर्ड अदालत में पेश करने के आदेश दिए हैं। जिसको लेकर बुधवार को राज्य सरकार हाईकोर्ट में रिकॉर्ड पेश करेगी।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जेबीटी शिक्षकों के 50 फीसदी पदों को पदोन्नति से भरने के मामले में राज्य सरकार बुधवार को रिकॉर्ड पेश करेगी। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने पिछले आदेश में जेबीटी शिक्षकें के चयन से जुड़ा रिकॉर्ड अदालत में पेश करने के आदेश दिए हैं। पहले इस मामले की सुनवाई मंगलवार को होनी थी, जो किसी कारणवश नहीं हो सकी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिमाचल प्रदेश के प्रारंभिक शिक्षा विभाग में जेबीटी शिक्षकों के पद के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार सीधी भर्ती हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर के माध्यम से 50 फीसदी और संबंधित जिले के प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक के माध्यम से बैच वाइज आधार पर 50 फीसदी के माध्यम से भरा जाना आवश्यक है। शिक्षा विभाग ने बैचवाइज कोटे में शारीरिक रूप से दिव्यांग कोटे के लिए दिए जाने वाले आरक्षण की अनदेखी करते हुए सीधी भर्ती के माध्यम से उक्त श्रेणी के पदों को 100 फीसदी भरने की प्रक्रिया शुरू की है।

कोर्ट ने आरएंडपी नियमों के खंड 10 का अवलोकन करने के बाद पाया था कि जेबीटी शिक्षक के 50 फीसदी पदों को हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर के माध्यम से अनुबंध के आधार पर सीधी भर्ती द्वारा भरा जाना आवश्यक है, जबकि शेष पद 50 फीसदी संबंधित जिले के प्रारंभिक शिक्षा उप निदेशक के माध्यम से बैच वाइज आधार पर भरे जाने हैं। हाईकोर्ट ने कहा था कि चूंकि सभी श्रेणियों के पदों को आरएंडपी नियमों के आधार पर भरा जाना है। इसलिए शारीरिक रूप से विकलांगों की श्रेणी में उपलब्ध पद को भी आरएंडपी नियमों के अनुसार भरा जाना आवश्यक है।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मुकदमे में डिक्री के तहत आवश्यक कोर्ट फीस जमा करने के लिए समय बढ़ाने की मांग वाली याचिका को खारिज करने के आदेश को सही ठहराया। साथ ही निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की पीठ ने 10 फरवरी 2025 को सीनियर सिविल जज ऊना की ओर से पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।

निचली अदालत ने याचिकाकर्ता के पक्ष में 9 नवंबर 2023 को एक मुकदमे में डिक्री पारित की गई थी। डिक्री की शर्तों के अनुसार याचिकाकर्ता को 30 दिनों के भीतर कोर्ट फीस जमा करनी थी। याचिकाकर्ता कोर्ट फीस जमा करने की निर्धारित समय सीमा का पालन करने में विफल रहा। याचिकाकर्ता ने 6 मई 2024 को डिक्री की तारीख के काफी बाद कोर्ट फीस जमा करने के लिए समय विस्तार की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि कोर्ट फीस जमा करने में हुई देरी जानबूझकर नहीं थी।

याचिकाकर्ता ने अपने आवेदन में दावा किया था कि वह 3 दिसंबर 2023 से दो महीने के लिए अपने परिवार के साथ तीर्थयात्रा पर चला गया था। तीर्थयात्रा से लौटने के बाद वह संक्रमण और बुखार से पीड़ित हो गया था। हाईकोर्ट ने पाया कि तीर्थयात्रा पर जाने या बीमारी से पीड़ित होने के याचिकाकर्ता के दावों का समर्थन करने वाला कोई दस्तावेज रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया गया था। न्यायालय ने कहा कि वकील और याचिकाकर्ता दोनों के पास आदेश का पालन करने के लिए पर्याप्त समय था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

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