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राजनीतिक तनाव: सचिव के तबादले को लेकर आयोग-सरकार आमने-सामने

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पहले पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर भी सरकार और आयोग के बीच उनी थी, अब सचिव के तबादलों को लेकर दोनों आमने-सामने हो गए हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव को लेकर प्रदेश सरकार और आयोग के बीच फिर टकराव की स्थिति बन गई है। पहले पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर भी सरकार और आयोग के बीच उनी थी, अब सचिव के तबादलों को लेकर दोनों आमने-सामने हो गए हैं। प्रदेश सरकार की ओर से हाल ही में राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव सुरजीत राठौर का तबादला आदेश जारी किए गए। मुख्यमंत्री के अतिरिक्त सचिव हरीश गज्जू को आयोग का सचिव लगाया गया, लेकिन आयोग ने सुरजीत को पद से रिलीव नहीं किया और गज्जू की ज्वाइनिंग नहीं ली। इसी बीच आयोग ने मुख्य सचिव (सीएस) को पत्र लिखा है।

इसमें कहा गया है कि आयोग को स्वतंत्र सचिव चाहिए। गज्जू सीएम कार्यालय में अटैच हैं। आयोग में स्वतंत्र अधिकारी की तैनाती की जा सकती है। अभी तक सीएस की ओर से आयोग को पत्र का जवाब नहीं मिला है। इसके बारे में मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने कहा कि तबादले के बाद आयोग के सचिव के रिलीव न होने का मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखा है। प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल जनवरी के अंत में पूरा होना है। सुरजीत को पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कराने का अनुभव है। नए सचिव को आयोग के बारे में समझने के लिए समय लगेगा। आयोग का मानना है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव सिर पर हैं। मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट में सुनवाई 30 दिसंबर को है।

हिमाचल प्रदेश में अप्रैल में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव हो सकते हैं। पंचायतों के पुनर्सीमांकन, पुनर्गठन और नई मतदाता सूचियां बनाने में कम से कम दो महीने का समय लग सकता है। संस्थाओं का कार्यकाल जनवरी में पूरा होने जा रहा है। दो महीने के लिए सरकार को पंचायतों में प्रशासक की तैनाती करनी पड़ सकती है। ऐसे में यह चुनाव आगे अप्रैल तक खिसक सकते हैं।

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