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हिमाचल पंचायत चुनाव: चिट्टा तस्करों की एंट्री होगी बंद, नया कानून बनाने की तैयारी

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प्रदेश में चिट्टा तस्करी में संलिप्त लोगों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने के लिए सरकार कानून बनाने जा रही है।

हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी में संलिप्त लोगों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने के लिए सरकार कानून बनाने जा रही है। विधि विभाग से चर्चा के बाद राज्य सरकार ने इस संबंध में संशोधन विधेयक का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसे विधानसभा के बजट सत्र में लाया जा रहा है। चिट्टे के साथ पकड़े जाने या तस्करी पर एफआईआर दर्ज को इसके लिए आधार बनाया जाएगा। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार इसके लिए पंचायती राज एक्ट में भी नया कानूनी प्रावधान जोड़ने जा रही है। हिमाचल प्रदेश में सैकड़ों लोगों के खिलाफ चिट्टे के मामले दर्ज हुए हैं।

पुलिस कर्मियों से लेकर अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारी भी चिट्टे के साथ पकड़े गए हैं। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ऐसे कर्मचारियों की सेवाएं तक समाप्त कर दी हैं। अब पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव से जुड़े कानून को भी सख्त बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विधि विभाग से विचार-विमर्श करने के बाद ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। अब विधानसभा के बजट सत्र में इसे लाया जाएगा। इस पर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल पहले ही कह चुके हैं कि चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित रखना कानूनी मामला है। अगर सरकार यह फैसला लेती है तो यह अदालत का विषय बन सकता है। इसी कारण सरकार इसमें कानूनी प्रावधान जोड़ने जा रही है।  

हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के लिए शुक्रवार को मतदाता सूचियां जारी हो सकती हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला उपायुक्तों को 30 जनवरी तक मतदाता सूचियों का प्रकाशन करने के लिए कहा है। 31 जनवरी को पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। इसके बाद पंचायतों में प्रशासक लगाने की तैयारी है। अभी तक 47 नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त किए हैं। राज्य सरकार ने प्रशासक लगाने के लिए राजस्थान व अन्य राज्यों के ड्राफ्ट का भी अध्ययन किया है। मतदाता सूचियों का प्रकाशन पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव की अगली प्रक्रिया तय करेगा। हालांकि, चर्चा यह भी है कि वोटर सूचियों के प्रकाशन की तिथि दो दिन और आगे बढ़ सकती है।

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