

हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति निगम (एससी-एसटी कॉर्पोरेशन) ऋण न चुकाने वालों पर सख्त रुख अपनाया है। निगम ने 22 डिफाल्टरों के गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। ये गिरफ्तारी वारंट निगम की ओर से कुल्लू और मंडी के डिफाल्टरों के खिलाफ जारी किए गए हैं। अब यदि इन डिफाल्टरों ने निगम का पैसा चुकाना शुरू नहीं किया तो निगम को सख्त कदम उठाना पड़ सकता है। निगम की ओर से इन सभी डिफाल्टरों को चार से पांच बार पहले भी पैसा चुकाने के लिए नोटिस भेजे गए थे। इसके बाद भी पैसा नहीं देने पर इन्हें निगम ने राजस्व अदालत में पेश होने के लिए नोटिस भेजा। ये डिफाल्टर राजस्व अदालत में भी नहीं पहुंचे। ऐसे में अब निगम ने सख्त कदम उठाते हुए इन डिफाल्टरों को ऋण चुकाने का अंतिम मौका दिया है। वहीं, इनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर संबंधित पुलिस को भी इसकी जानकारी दे दी गई है।
इसके बाद भी यदि ये ऋण नहीं चुकाते हैं तो निगम सख्त कार्रवाई करेगा। इन 22 डिफाल्टरों में से 11 कुल्लू और 11 मंडी से संबंधित हैं। मंडी के 11 डिफाल्टरों के पास निगम की करीब 9 लाख रुपये की राशि अटकी पड़ी है। इनमें से एक के पास 6 लाख रुपये और अन्य 10 डिफाल्टरों के पास करीब 3 लाख रुपये की राशि बकाया है। वहीं, कुल्लू के 11 डिफाल्टरों के पास निगम के करीब 4 लाख रुपये अटके हैं। इनमें से एक के पास 2 लाख और अन्य 10 के पास 2 लाख रुपये का ऋण बकाया है। ऐसे में इन डिफाल्टरों में से 20 ने निगम से करीब 15 साल पहले लिया गया मात्र 25 हजार रुपये तक का ऋण भी नहीं चुकाया है।
निगम की ओर से लोगों को लोन लेने के बाद उसे चुकाने के लिए काफी अधिक समय दिया जाता है। इसके बाद भी यदि कोई व्यक्ति निगम का पैसा नहीं चुकाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी करना पड़ रहा है। निगम कोशिश कर रहा है कि गिरफ्तारी वारंट जारी किए बिना भी लोन की राशि वसूली जाए।– राहुल जैन प्रबंध निदेशक, एससी-एसटी कॉर्पोरेशन, हिमाचल प्रदेश







