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पहाड़ों पर फिर टूटा मानसून का कहर, सड़कें बंद होने से कई इलाके कटे… राहत और बचाव अभियान के बीच बढ़ी चिंता

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हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर कहर बरपा रहा है। राज्य में बीते 24 घंटों से लगातार जारी बारिश से जगह-जगह भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। नदी-नाले उफान पर हैं। सिरमौर में चूना पत्थर खान में भूस्खलन होने से मलबे में दबे तीन मजदूरों की तलाश जारी है। माैके पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार मंगलवार सुबह 10:00 बजे तक प्रदेश में 279 सड़कें बंद रहीं। इसके अतिरिक्त 310 पेयजल योजनाएं और 84 बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित रहे। सबसे अधिक सड़कें चंबा, मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और शिमला जिले में प्रभावित हैं।

मंगलवार को सिरमौर जिले के कफोटा उपमंडल के बागनाधार में खनन क्षेत्र में मंगलवार को चूना पत्थर खान में अचानक भूस्खलन हो गया। पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा खिसकने से वहां खड़े तीन डंपर चालकों समेत मलबे में दब गए। दबे चालकों में अनिल कुमार निवासी बड़वास (सिरमौर), नेपाल निवासी गजेंद्र सिंह (65) और धन सिंह (68) बताए जा रहे हैं। नायब तहसीलदार कमरऊ ओम प्रकाश ठाकुर ने बताया कि बचाव कार्य जारी है, लेकिन स्लाइडिंग जोन होने के कारण लगातार मलबा गिर रहा है, जिससे राहत और बचाव अभियान प्रभावित हो रहा है। खनन पर रोक है लेकिन बताया जा रहा है कि कुछ मजदूर सामान लेने के लिए खान में गए थे। उपायुक्त प्रियंका वर्मा ने बताया कि एनडीआरएफ टीम भी मौके पर भेजी जा रही है ताकि मलबे में दबे लोगों को निकालने के अभियान को और प्रभावी बनाया जा सके।

सोलन जिले के परवाणू और आसपास के क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश ने व्यापक असर डाला। कालका-शिमला रेललाइन पर कोटी और गुम्मा रेलवे स्टेशन के बीच भारी मात्रा में मलबा और पत्थर आने से रेल यातायात प्रभावित हुआ। सुरक्षा कारणों से चार ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। इनमें दो ट्रेनें शिमला, एक तारादेवी और एक कोटी रेलवे स्टेशन पर रोकी गईं। कोटी से यात्रियों को बसों के माध्यम से कालका भेजा गया। आज भी सेवाएं बाधित हैं। वहीं, परवाणू शहर में कई स्थानों पर जलभराव हो गया और कई वाहन आधे तक पानी में डूब गए। 

धर्मपुर उपमंडल में पिछले दो दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने लगा है। भारी बारिश के चलते क्षेत्र के नदी-नालों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, वहीं जगह-जगह मलबा, पत्थर और भूस्खलन आने के कारण एनएच-03 सहित कई संपर्क सड़कें यातायात के लिए बाधित हुईं। प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण सड़क यातायात प्रभावित हुआ है और कई मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना है। बारिश के कारण सड़क मार्गों पर पैदा हुई स्थिति को देखते हुए एनएच निर्माण कार्य में लगी कंपनी तथा लोक निर्माण विभाग मंडल धर्मपुर के अधिकारियों ने तत्काल मशीनरी और कर्मचारियों को मौके पर तैनात किया। एसडीएम धर्मपुर जोगिंदर पटियाल ने बताया कि बारिश के कारण सड़क यातायात प्रभावित होने की स्थिति को देखते हुए एनएच निर्माण कार्य कर रही कंपनी के पदाधिकारियों तथा लोक निर्माण विभाग मंडल धर्मपुर के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।

जिला कुल्लू में बुधवार सुबह से बारिश का दौर जारी है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। सुबह करीब 8 बजे से हो रही बारिश के चलते लोगों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं सहित सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। मूसलाधार बारिश के कारण जिला मुख्यालय कुल्लू की निकासी नालियां अचानक भर गईं। नालियों का पानी सड़कों और गलियों में बहने लगा, जिससे राहगीरों को आवाजाही में परेशानी हुई। लगातार बारिश से शहर में जगह-जगह जलभराव की स्थिति बनी रही।

शिमला के भट्टाकुफर में भारी बारिश से भूस्खलन हुआ है। इससे दो गाड़ियां मलबे में दब गई हैं। इससे यातायात भी बाधित हो  वहीं लंबिधार एंबुलेंस रोड पर भी भूस्खलन हुआ। इससे रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।

चकमोह में गिरा पेड़, मार्ग बाधित
भारी बारिश के कारण चकमोह में जालपा मंदिर से बाबा बालक नाथ पीजी कॉलेज की ओर जाने वाला संपर्क मार्ग बाधित हो गया । बारिश के चलते एक बड़ा पेड़ सड़क के बीचोंबीच गिर गया, जिससे इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई। इस मार्ग से रोजाना कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों के अलावा स्थानीय ग्रामीण और अन्य लोग भी आवागमन करते हैं। रास्ता बंद होने के कारण लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है।

हिमाचल प्रदेश के सात जिलों हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिला के कई क्षेत्रों में बुधवार को बारिश का येलो अलर्ट जारी हुआ है। गुरुवार को चार जिलों चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी के लिए येलो अलर्ट जारी हुआ है। 25 अगस्त तक प्रदेश के कई भागों में बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान है। इस अवधि में कुछ क्षेत्रों में भूस्खलन और बाढ़ आने की संभावना भी जताई गई है।

कहां कितनी बारिश
सुजानपुर टीहरा में 156.4, नयना देवी 138.6, नादौन 128.4, धर्मशाला 127.2, भरवाईं 118.0, कांगड़ा एयरो 111.0, पालमपुर 111.0, नगरोटा सूरियां  90.8, नाहन 76.0, शिमला 32.0, ऊना 39.0, मंडी 33.5, बिलासपुर 57.0, हमीरपुर 80.5, बरठीं 43.4, कसाैली 60.0, पांवटा साहिब 54.0 व नेरी में 94.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

इस मानसून सीजन में 30 जून से 18 अगस्त तक प्रदेश में आपदा की वजह से 197 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 313 लोग घायल हुए हैं। 32 पक्के और 53 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं 314 कच्चे-पक्के मकानों को आंशिक क्षति पहुंची है। इसके अलावा 14 दुकानों व 284 गोशालाओं को भी नुकसान पहुंचा है। इस अवधि के दाैरान 429 पालतु पशु-पक्षियों की माैत हो गई। प्रदेश में इस मानसून में नुकसान का आंकड़ा 1,00,171.78 लाख रुपये पहुंच गया है।

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