
शिमला। हिमाचल प्रदेश में हथियार लाइसेंस जारी करने और उसकी वैधता बढ़ाने की प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार ने निगरानी और सख्त कर दी है। गृह विभाग ने प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि अब नया हथियार लाइसेंस जिला उपायुक्त अपने स्तर पर जारी नहीं कर सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होगी।
गृह विभाग के निर्देशों के मुताबिक, जिला स्तर पर आवेदन की जांच करने के बाद मामले को सरकार की मंजूरी के लिए भेजना होगा। जिला मजिस्ट्रेट को निर्धारित प्रारूप में मामले का पूरा औचित्य और अपनी सिफारिश भी देनी होगी। केवल औपचारिक प्रस्ताव भेजने से प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही लाइसेंसिंग अथॉरिटी आगे की कार्रवाई कर सकेगी।
मल्टी स्टेट और ऑल इंडिया लाइसेंस पर भी सरकार की मंजूरी
नए हथियार लाइसेंस के अलावा ऐसे लाइसेंस जिनकी वैधता हिमाचल प्रदेश से बाहर अन्य राज्यों तक बढ़ानी हो या पूरे देश में लागू हो, उनके नवीनीकरण और वैधता क्षेत्र बढ़ाने के मामलों में भी राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी जरूरी होगी।
यदि कोई लाइसेंसधारी हिमाचल के अलावा दूसरे राज्यों में हथियार रखने की अनुमति चाहता है या लाइसेंस को ऑल इंडिया वैधता देना चाहता है, तो जिला स्तर पर अब इसका अंतिम फैसला नहीं हो सकेगा। ऐसे मामलों में भी उपायुक्त की सिफारिश और उचित कारणों के साथ प्रस्ताव सरकार को भेजना होगा।
कानूनी वारिसों के लिए बड़ी राहत
हालांकि, हथियार लाइसेंस के कानूनी वारिस के नाम हस्तांतरण के मामलों में अलग व्यवस्था रखी गई है। ऐसे मामलों को सरकार के पास भेजने की जरूरत नहीं होगी और निर्धारित नियमों के तहत जिला स्तर पर ही इनका निपटारा किया जा सकेगा।
नियमों के अनुसार, लाइसेंसधारी की मृत्यु के बाद, उसके 70 वर्ष की आयु पूरी होने पर और एक ही व्यक्ति के नाम लाइसेंस के 25 वर्ष पूरे होने के बाद, निर्धारित शर्तों के तहत कानूनी वारिस के नाम लाइसेंस हस्तांतरित किया जा सकेगा।
इससे वारिसों से जुड़े मामलों में अनावश्यक प्रशासनिक देरी कम होने की संभावना है।
हिमाचल में एक लाख से ज्यादा लाइसेंसी हथियार
प्रदेश में लाइसेंसी हथियार रखने वालों की संख्या एक लाख से अधिक बताई गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हिमाचल में करीब 1,00,403 लाइसेंसी हथियार धारक हैं। कांगड़ा, शिमला और मंडी में लाइसेंसी हथियार धारकों की संख्या सबसे अधिक है।
पहाड़ी और कृषि प्रधान क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हथियार लाइसेंस फसल सुरक्षा और आत्मरक्षा जैसे कारणों से जारी किए गए हैं।
सरकार के नए निर्देशों के बाद अब नए हथियार लाइसेंस और उनकी वैधता से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में जिला स्तर के साथ-साथ राज्य सरकार की निगरानी भी रहेगी। इससे लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में जवाबदेही और नियंत्रण बढ़ने की उम्मीद है।








