Home Himachal News निष्क्रिय बैंक खातों पर सख्ती, अब एसडीएम देंगे सरकार को रिपोर्ट

निष्क्रिय बैंक खातों पर सख्ती, अब एसडीएम देंगे सरकार को रिपोर्ट

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हिमाचल प्रदेश में आर्थिक चुनौती से जूझ रही सरकार अब अपने कोष के लिए पाई-पाई का प्रबंध करने में जुट गई है। वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार सख्त कदम उठा रही है। वित्त एवं योजना विभाग ने सभी उपमंडल अधिकारियों (एसडीएम) को निर्देश दिए हैं कि वह अपने-अपने क्षेत्रों के कोषागारों में मौजूद निष्क्रिय खातों की जानकारी एकत्र कर राज्य सरकार को उपलब्ध कराएं। इसमें जो भी धन जमा है, उसे सरकारी कोष में जमा करना होगा। प्रधान सचिव वित्त एवं योजना देवेश कुमार के निर्देश पर सभी एसडीएम का एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बना है। इसमें अपडेट लिया जा रहा है।

प्रदेश के सरकारी विभागों के विभिन्न बैंकों में करीब 12 हजार करोड़ रुपये ऐसे हैं, जो बिना खर्च पड़े हुए हैं। ये एफडीआर या अन्य रूपों में जमा है। बिना खर्च बजट के रूप में राज्य सरकार का अपना बजट भी है। उन योजनाओं का बजट कोषागार में डालने को पहले ही कह दिया है, जिनका काम पिछले दशकों से आगे नहीं बढ़ा है। इनका ब्याज भी जमा करने को कहा है, जिससे इस बजट का समुचित उपयोग हो सके। कई विभागों ने बजट को जमा कर दिया है। कई नहीं कर रहे हैं। कई विभागों के कई बैंकों में दर्जनों खाते भी खुले हुए हैं। ये निष्क्रिय हैं। इनमें से कुछ में तो कुछ हजार रुपये भी जमा हैं। ऐसे खातों को चिन्हित करने के लिए सभी एसडीएम को कहा गया है।

वित्त विभाग के अनुसार, कई सरकारी विभागों ने अपनी योजनाओं और परियोजनाओं के लिए मिले बजट को समय पर खर्च नहीं किया है। परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये की राशि विभिन्न खातों में एफडीआर के रूप में पड़ी है। फिर भी वही विभाग सरकार से अतिरिक्त बजट या ग्रांट-इन-एड की मांग कर रहे हैं। ऐसे में वित्त विभाग ने अब निर्णय लिया है कि जब भी कोई विभाग अतिरिक्त बजट या ग्रांट के लिए आवेदन करेगा, तो उसका प्रस्ताव बजट डिविजन की गहन समीक्षा के बाद ही स्वीकृत किया जाएगा। डिविजन इन विभागों के बैंकों में जमा एफडीआर की स्थिति की जांच करेगा और यदि पाया गया कि विभाग के पास पर्याप्त अप्रयुक्त धन पहले से उपलब्ध है, तो उसी अनुपात में बजट में कटौती की जाएगी। इस संबंध में हाल ही में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हो चुकी है। बैठक में वित्त विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी विभागों से संबंधित खातों और एफडीआर का नियमित ऑडिट किया जाए तथा नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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