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नौ शहरी निकायों में बढ़ा सस्पेंस, निर्दलीयों के एक फैसले से पलट सकता है पूरा समीकरण… जानें पूरी खबर

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अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले दोनों दलों ने जोड़-तोड़ और संपर्क अभियान तेज कर दिया है।

हिमाचल प्रदेश के नौ नगर निकायों में न तो कांग्रेस और न ही भाजपा स्पष्ट बहुमत जुटा पाई है। ऐसे में अन्य पार्षद सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेकर किंगमेकर की भूमिका में आ गए हैं। अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले दोनों दलों ने जोड़-तोड़ और संपर्क अभियान तेज कर दिया है। सबसे ज्यादा रोमांचक स्थिति ठियोग, चंबा, सरकाघाट और कुल्लू नगर परिषदों में बनी हुई है जहां कांग्रेस और भाजपा समर्थित पार्षदों की संख्या बराबर है। वहीं सुजानपुर, पांवटा साहिब, मैहतपुर, अंब और नेरवा में अन्य पार्षद सत्ता गठन में निर्णायक भूमिका निभाने जा रहे हैं। दोनों दलों के नेता लगातार संपर्क साधने में जुटे हैं। कई जगह बैठकों और रणनीति का दौर चल रहा है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ निकायों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पद का अन्य को भरोसा दिया जा रहा है। ठियोग, चंबा, सरकाघाट व कुल्लू में कांग्रेस-भाजपा समर्थित पार्षद बराबर होने से अध्यक्ष पद का फैसला अन्य के वोट पर अटक गया है। यहां अन्य पार्षद का समर्थन जिस दल को मिलेगा, वही निकाय पर अपना कब्जा जमा सकेगा। इन नगर निकायों में अगले कुछ दिन अहम रहने वाले हैं। हमीरपुर जिले के सुजानपुर में भी स्थिति रोचक बनी हुई है। यहां अन्य पार्षदों के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं। पांवटा साहिब, ऊना के मैहतपुर, अंब और शिमला जिले के नेरवा में भी सत्ता संतुलन अन्य पार्षदों के हाथ में है। 

निकायों में सत्ता गठन को कांग्रेस और भाजपा दोनों की प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही हैं। कांग्रेस जहां निकाय चुनावों के नतीजों को सरकार की नीतियों पर मुहर बताने में जुटी है, वहीं भाजपा इसे कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता के असंतोष का संकेत बता रही है। अब असली परीक्षा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में होगी, जहां राजनीतिक गणित के साथ-साथ रणनीति भी निर्णायक साबित होगी।

नगर निकाय कांग्रेस भाजपा अन्य
ठियोग 3 3 1
चंबा 5 5 1
सरकाघाट 3 3 1
कुल्लू 3 3 5
सुजानपुर 2 3 4
पांवटा साहिब 0 4 9
मैहतपुर 3 4 2
नेरवा 0 1 2
अंब 2 4 3
निकाय चुनाव परिणाम पर जीत के सियासी दावे, नपं-नप अध्यक्ष के लिए कांग्रेस-भाजपा ने बिछाई बिसात
नगर निकाय चुनाव परिणाम घोषित होते ही नगर परिषद और नगर पंचायतों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पदों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों ने अपने-अपने समर्थित पार्षदों को साधने के साथ निर्दलीय सदस्यों को अपने पक्ष में लाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस ने जहां जिला अध्यक्षों को निर्दलीय पार्षदों से संपर्क कर समर्थन जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी है, वहीं मंत्रियों और विधायकों को भी सक्रिय कर दिया गया है। भाजपा के जिला अध्यक्षों ने सोमवार को ही सूचियां तैयार कर पार्टी नेतृत्व को भेज दी हैं।

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