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न्यूनतम योग्यता अंक घटाने की मांग पर हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, अब आगे क्या होगा? पढ़ें पूरी खबर

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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परीक्षा के नियम और पासिंग मार्क्स तय करना पूरी तरह से नियोक्ता का विशेषाधिकार है। योग्यता अंक तय करना भर्ती एजेंसी का काम है। जब तक यह मानदंड प्रथम दृष्टया पूरी तरह से मनमाना या अनुचित न हो, तब तक अदालतें कुछ उम्मीदवारों की सुविधा के लिए इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगी।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एसएमसी शिक्षकों की एलडीआर भर्ती परीक्षा में न्यूनतम योग्यता अंक घटाने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परीक्षा के नियम और पासिंग मार्क्स तय करना पूरी तरह से नियोक्ता का विशेषाधिकार है। योग्यता अंक तय करना भर्ती एजेंसी का काम है। जब तक यह मानदंड प्रथम दृष्टया पूरी तरह से मनमाना या अनुचित न हो, तब तक अदालतें कुछ उम्मीदवारों की सुविधा के लिए इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगी। कोर्ट ने कहा कि 45 या 40 फीसदी का पासिंग मार्क्स रखना कहीं से भी अत्यधिक या मनमाना नहीं है, बल्कि यह एक बेहद तार्किक और सामान्य प्रतिशत है।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने यह फैसला याचिकाकर्ता अश्वनी कुमार की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि विज्ञापन में पासिंग मार्क्स की शर्तें पूरी तरह स्पष्ट और पारदर्शी थीं। याचिकाकर्ता ने इन नियमों को जानते हुए परीक्षा में भाग लिया और जब वह फेल हो गया, तब उसने नियमों को चुनौती दी, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि जिस अधिसूचना का हवाला याचिकाकर्ता दे रहा है, वह ओपन मार्केट की आम भर्ती थी।

जबकि यह मौजूदा भर्ती केवल एसएमसी नीति के तहत लगे जॉब ट्रेनियों के लिए एक सीमित प्रक्रिया है, इसलिए दोनों की तुलना नहीं की जा सकती। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 20 दिसंबर 2025 को एक विज्ञापन जारी किया था। इसके तहत एसएमसी नीति के तहत लगे इन-सर्विस शिक्षकों के लिए टीजीटी (आर्ट्स, मेडिकल, नॉन-मेडिकल), शास्त्री, हिंदी और ड्राइंग मास्टर के पदों पर सीमित सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस विज्ञापन में साफ तौर पर लिखा था कि 200 अंकों की इस ऑब्जेक्टिव परीक्षा में अनाआरक्षित और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए न्यूनतम 45 फीसदी (यानी 90 अंक) लाना अनिवार्य था।

आरक्षित एससी, एसटी, ओबीसी और दिव्यांगों के लिए न्यूनतम 40 फीसदी (यानी 80 अंक) लाना अनिवार्य था। याचिकाकर्ता जो कि सामान्य श्रेणी से संबंध रखता है, उसने इस परीक्षा में भाग लिया लेकिन 200 में से केवल 71 अंक ही प्राप्त कर सका और अनुत्तीर्ण हो गया। उसने अदालत में तर्क दिया कि राज्य चयन आयोग द्वारा ओपन मार्केट से की जाने वाली इसी तरह की अन्य भर्तियों में सामान्य वर्ग के लिए योग्यता अंक 35 फीसदी और आरक्षित वर्ग के लिए 30 फीसदी तय किए गए हैं।समानता के सिद्धांत के आधार पर शिक्षा बोर्ड को भी इस भर्ती में पासिंग मार्क्स घटाकर 35 फीसदी करने के आदेश दिए जाए।

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