

परिवहन निगम के रूट बंद होने से शिमला में जहां लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो वहीं परिवहन निगम को हर दिन लाखों रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है।
भारी वर्षा के कारण बंद हुई सड़कों की बहाली का काम जिला में हालांकि जारी है, लेकिन हालात अभी भी खराब है। जिला में 100 से ज्यादा सड़कें अभी भी बंद है।
इनमें हालांकि मुख्य सड़कों को खोल दिया गया है, लेकिन संपंर्क सड़कें अभी भी बंद है। ऐसे में शिमला डिविजन में एचआरटीसी के 360 रूट अभी भी बंद है। इसके कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं दूसरी ओर एचआरटीसी को रोजाना 35 से 40 लाख रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है। परिवहन निगम के अधिकारियों का कहना है कि जिला में सड़कें बंद होने से हालांकि सभी मुख्य रूट खुल गए हैं, लेकिन संपंर्क सड़कों पर चलने वाले रूट अभी भी बंद है।
इनमें नेरवा डिपो में सबसे ज्यादा रूट बंद है। नेरवा के अलावा जुब्बल, रोहड़ू, कोटखाई और रामपुर में कई संपंर्क सड़कें अभी भी बंद है। इसके कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
एचआरटीसी अधिकारियों का कहना है कि जैसे जैसे सड़कें बहाल हो रही है, वैसे वैसे रूट भी बहाल किए जा जा रहे है, लेकिन ज्यादा दिनो तक सड़कें बंद होने सेे एचआरटीसी को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। शिमला डिविजन में अभी तक एक करोड़़ से ज्यादा का नुकसान परिवहन निगम को हो चुका है।
जिला में पथ परिवहन निगम की सेवाएं बंद होने से लोगों को हर दिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बता दें कि शिमला में ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन निगम की बसें ही लोक परिवहन का मुख्य हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्रों से दफ्तारों को जाने वाले कर्मचारी एवं स्कूली बच्चे एचआरटीसी बसों का प्रयोग करते है। ऐसे में बस सेवाएं बंद होने से इन लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सडकें बंद होने से शिमला डिविजन में 360 से ज्यादा रूट बंद है। इनमें सभी रूट संपंर्क सड़कों के बंद है। बस रूट बंद होने से शिमला डिविजन में परिवहन निगम को 35 से 40 लाख रुपए का नुकसान ज्यादा उठाना पड़ रहा है। -देवा सेन नेगी, डीएम शिमला डिविजन







