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मंडी में सड़क किनारे मिले तीन पैकेट, अंदर निकले जीवनरक्षक इंजेक्शन; एक महीने बाद अस्पताल पहुंचे तो खुला बड़ा राज

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मंडी के मलोरी टनल के पास सड़क किनारे मिले तीन पैकेटों ने स्वास्थ्य विभाग की दवा आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब एक माह पहले स्थानीय कारोबारी रंगारंग सिंह को ये पैकेट सड़क किनारे पड़े मिले थे। जब उन्होंने पैकेटों को देखा तो उनमें एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन थे। इन इंजेक्शनों का इस्तेमाल सांप के काटने वाले मरीजों के उपचार में किया जाता है।

रंगारंग सिंह ने इन पैकेटों को सुरक्षित अपने पास रख लिया था। इसके बाद वीरवार को उन्होंने समय निकालकर जोनल अस्पताल मंडी पहुंचकर तीनों पैकेट मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक चौहान को सौंप दिए। अस्पताल प्रशासन ने इंजेक्शनों को सुरक्षित रखने की बात कही है।

बस का इंतजार करते समय सड़क किनारे दिखे थे पैकेट

रंगारंग सिंह ने बताया कि वह मलोरी टनल के पास बस का इंतजार कर रहे थे और इसी दौरान सड़क किनारे टहलते हुए उनकी नजर तीन डिब्बों पर पड़ी। उन्होंने जब डिब्बों की जांच की तो पता चला कि इनमें एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन रखे हुए थे।

इंजेक्शनों की अहमियत को देखते हुए उन्होंने इन्हें सुरक्षित रखा और बाद में अस्पताल प्रशासन को सौंपने का फैसला किया। पैकेटों पर मार्च 2030 तक की एक्सपायरी डेट दर्ज है।

स्वास्थ्य विभाग की सप्लाई से जुड़ रहे इंजेक्शन

मामले में यह आशंका जताई जा रही है कि ये इंजेक्शन स्वास्थ्य विभाग की ओर से विभिन्न स्वास्थ्य खंडों में भेजी जा रही दवा की आपूर्ति के दौरान किसी वाहन से रास्ते में गिर गए होंगे। हालांकि, ये पैकेट किस वाहन से गिरे और इनके सड़क किनारे पहुंचने की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक चौहान के अनुसार, पैकेटों पर दर्ज बैच नंबर जिला के विभिन्न स्वास्थ्य खंडों को भेजी गई दवा की आपूर्ति से मेल खाता है। उन्होंने बताया कि दवा के गुम होने को लेकर विभाग के पास कोई आधिकारिक शिकायत नहीं आई थी।

जरूरत पड़ने पर सर्पदंश के मरीजों के आएंगे काम

सीएमओ ने बताया कि इंजेक्शनों की एक्सपायरी अभी बाकी है और पैकेट सुरक्षित स्थिति में हैं। अस्पताल प्रशासन इन्हें सुरक्षित रखेगा और आवश्यकता पड़ने पर सर्पदंश के मरीजों के उपचार में इस्तेमाल किया जाएगा।

एंटी स्नेक वेनम सांप के काटने के उपचार में बेहद महत्वपूर्ण दवा है। ऐसे में सड़क किनारे पड़े इन इंजेक्शनों का अस्पताल तक पहुंचना मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

वहीं, इस घटना से स्वास्थ्य विभाग की दवाओं की ढुलाई और आपूर्ति व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि आखिर जीवनरक्षक इंजेक्शनों के तीन पैकेट सड़क किनारे कैसे पहुंचे और इन्हें ले जा रहे वाहन से ये कब और किन परिस्थितियों में गिरे।

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