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शिमला। हिमाचल प्रदेश के कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में वीसी नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद अब नई दिशा में पहुंच गया है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 अगस्त 2026 को दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति से जुड़े राज्य सरकार के संशोधित प्रावधानों और संबंधित विज्ञापनों को रद्द करते हुए यूजीसी के 2018 के नियमों के अनुसार नई चयन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय ने दोनों विश्वविद्यालयों के लिए पहले गठित खोज-सह-चयन समितियों को भंग कर दिया था और नए सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई। नई प्रक्रिया में यूजीसी के नियमों के अनुरूप चयन समिति गठित करने की बात सामने आई थी।
इसी बीच हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। कृषि सचिव सी. पाल रासू ने सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने की पुष्टि की है। अब दोनों विश्वविद्यालयों में वीसी नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के रुख पर निर्भर कर सकती है।
हाईकोर्ट के फैसले में यूजीसी के 2018 के विनियमों के अनुरूप चयन समिति बनाने पर जोर दिया गया था। इसमें यूजीसी के अध्यक्ष की ओर से नामित प्रतिनिधि को शामिल करना जरूरी माना गया था, जबकि विश्वविद्यालय से सीधे जुड़े अधिकारियों को चयन समिति से बाहर रखने का निर्देश दिया गया था। जरूरत होने पर आईसीएआर के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जा सकता है।
अब सवाल यह है कि राज्य सरकार की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के बाद दोनों विश्वविद्यालयों में शुरू की गई नई चयन प्रक्रिया आगे बढ़ती है या उस पर भी असर पड़ता है। फिलहाल इस मामले में अगला कदम सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद ही स्पष्ट होगा।








