
पूरी खबर:
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले एक युवा वकील के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अस्थायी पंजीकरण की अवधि समाप्त होने के बाद वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC) के बिना सार्वजनिक सड़क पर वाहन चलाना मोटर वाहन अधिनियम और बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। वहीं, मृतक के परिवार को राहत देते हुए अदालत ने मुआवजे की राशि 72.67 लाख रुपये से बढ़ाकर लगभग 1.01 करोड़ रुपये कर दी है।
न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की ओर से दायर अपील और मृतक की मां द्वारा दाखिल क्रॉस-ऑब्जेक्शन पर सुनवाई करते हुए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, चंबा के वर्ष 2013 के आदेश में संशोधन किया।
क्या है पूरा मामला?
यह हादसा 22 जुलाई 2011 को खजियार-डलहौजी मार्ग पर दैनकुंड नाले के पास हुआ था। एक कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई, जिसमें सवार 27 वर्षीय अंकित महाजन की मौके पर ही मौत हो गई। अंकित मुंबई की एक प्रसिद्ध लॉ फर्म में वकील के तौर पर कार्यरत थे।
मामले में सामने आया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन 10 जून 2011 को खरीदा गया था। वाहन का अस्थायी पंजीकरण 9 जुलाई 2011 को समाप्त हो चुका था, जबकि हादसे के दिन यानी 22 जुलाई 2011 तक उसका स्थायी पंजीकरण नहीं हुआ था। हालांकि, वाहन की मालकिन ने 19 जुलाई को क्षेत्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण (RLA), चंबा में आवश्यक दस्तावेज जमा कराए थे।
बीमा कंपनी को पहले देना होगा मुआवजा
मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने मृतक की मां को 72,67,700 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था और पूरी जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर डाली थी। बीमा कंपनी ने इस फैसले को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने माना कि वैध पंजीकरण के बिना वाहन चलाना बीमा पॉलिसी की शर्तों का मूलभूत उल्लंघन है। इसके बावजूद पीड़ित परिवार को राहत देने के लिए अदालत ने ‘पे एंड रिकवर’ का सिद्धांत लागू किया। इसके तहत बीमा कंपनी को पहले दावेदार को मुआवजे का भुगतान करना होगा और बाद में यह राशि वाहन की मालकिन से वसूल करने का अधिकार होगा।
मुआवजे की राशि भी बढ़ाई गई
हाईकोर्ट के फैसले से मृतक के परिवार को मिलने वाला मुआवजा लगभग 1.01 करोड़ रुपये हो गया है, जो पहले स्वीकृत 72.67 लाख रुपये से काफी अधिक है। इस फैसले में अदालत ने एक ओर वैध वाहन पंजीकरण और बीमा शर्तों के पालन की अहमियत स्पष्ट की, वहीं दूसरी ओर दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को आर्थिक राहत भी प्रदान की।








