

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लावारिस कुत्तों और अन्य जानवरों से संबंधित विभिन्न याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 22 अगस्त 2025 के आदेश के बाद दिया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों से संबंधित याचिकाओं को अपने पास स्थानांतरित करने का आदेश दिया था।
खंडपीठ ने पाया कि इन सभी याचिकाओं में लावारिस कुत्तों को खिलाने, सुरक्षित फीडिंग जोन, रैबीज की रोकथाम और पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023 का पालन कराने जैसे मुद्दे शामिल थे और एक-दूसरे से संबंधित हैं। हाईकोर्ट में एक याचिका में नगर निगम शिमला को सड़कों को कुत्तों से मुक्त रखने और उनके लिए फीडिंग स्पॉट निर्धारित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
वहीं, एक अन्य याचिका (सीडब्ल्यूपीआईएल 334/2024) में राज्य के पशु चिकित्सा अस्पतालों में 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं और प्रत्येक जिले में कम से कम एक अस्पताल खोलने की मांग की गई थी, जिससे पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत अपराध के शिकार जानवरों का इलाज, देखभाल और आवास सुनिश्चित हो सके। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि यह सभी मामले अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं। इसलिए इन सभी याचिकाओं को भी सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित किया गया है। रजिस्ट्रार जनरल को आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।







