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डल झील से भरमौर तक हर जगह मची तबाही; अस्थायी दुकानें बहीं, कई जगह न सड़कें बचीं न पुलिया

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डल झील से भरमौर तक हर जगह मची तबाही; अस्थायी दुकानें बहीं, कई जगह न सड़कें बचीं न पुलिया
प्रदेश में चंबा से लेकर मणिमहेश तक मची तबाही के सातवें दिन जिला मुख्यालय पहुंचे यात्रियों ने पहली बार पूरा मंजर बयां किया।

हिमाचल प्रदेश में चंबा से लेकर मणिमहेश तक मची तबाही के सातवें दिन जिला मुख्यालय पहुंचे यात्रियों ने पहली बार पूरा मंजर बयां किया। भलेई निवासी 27 वर्षीय अभिषेक राजपूत ने बताया कि 23 अगस्त को सुबह 6 बजे अचानक से मौसम खराब हो गया। देखते ही देखते इतनी भयावह स्थिति हो गई कि डल झील का परिक्रमा मार्ग पूरी तरह से लबालब हो गया। पानी का सैलाब इतना बढ़ा कि अस्थायी दुकानें, लंगर और लोगों का सामान पानी के तेज बहाव में बह गए। दो दिन वहीं रहे। 25 अगस्त की सुबह शिव के गूर ने भविष्यवाणी की कि पवित्र स्थल पर गंदगी के कारण ये तबाही हुई।

मंडी जिला के लडभड़ोल क्षेत्र की रहने वाली महिला अनीता देवी ने वहां पर भयावह मंजर बताते हुए कहा कि प्रशासन की लापरवाही से वहां लोग जिंदगी और मौत के पालने में झूल रहे हैं। मात्र चार इंच बचे रास्ते पर जान जोखिम में डालकर सफर किया और सुरक्षित चंबा पहुंचे। अनीता देवी के साथ लडभड़ोल क्षेत्र के ही नौ लोग साथ थे। खड़ामुख से चंबा पैदल पहुंची अनीता ने बताया कि बुधवार को वह करीब 2000 लोगों के साथ खड़ामुख में फंसी थी। कुछ लोग वहां टनल के अंदर तो कोई टनल के बाहर थे। रविवार से बुधवार तक लोग वहां फंसे रहे। पहाड़ियां भरभरा कर गिर रही थीं, बच्चे रो रहे थे। नेटवर्क न होने से न तो वहां प्रशासन और न ही घर में अपनों से कोई संपर्क हो रहा था। वहां दो जेसीबी मशीनें खड़ी थी, लेकिन ऑपरेटर अनुमति मिलने पर ही कार्य शुरू करने की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रविवार को सुंदरासी में बादल फटा था। कोई मदद के लिए नहीं पहुंचा। अब वहां सड़कों को बहाल करने में महीनों लग जाएंगे। अब बड़ी मुश्किल से अन्य लोगों के साथ खड़ामुख से लेकर चंबा तक पैदल आएं हैं। पैरों में छाले पड़ गए है। महिला ने कहा कि मणिमहेश यात्रा को कमाई का जरिया न बनाया जाए। सरकार और प्रशासन सुविधाएं भी उपलब्ध करवाएं। इस तरह की परिस्थितियों में सबसे पहले मोबाइल नेटवर्क होना जरूरी है। 

लोगों की परेशानी देख एक स्थानीय बुजुर्ग ने अपना घर लोगों के ठहरने के लिए खोल दिया। घर में रखे बिस्तर, गद्दे, चादरें सभी प्रभावितों को इस्तेमाल के लिए दे दीं। घर के एक कमरे में अगले 6 महीनों के लिए राशन जमा करके रखा था। बुजुर्ग ने यह राशन भी आपदा में फंसे लोगों के लिए खोल दिया। शिवम ने बताया बुजुर्ग ने मदद न की होती तो लोगों को कई दिनों तक भूखे रहना पड़ता।

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