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हिमाचल में रेलवे प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार, भानुपल्ली–बिलासपुर ट्रैक पर 402 करोड़ से बनेंगे दो पुल

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भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी नई रेल लाइन पर 401.98 करोड़ रुपये से दो महत्वपूर्ण बड़े पुलों का निर्माण किया जाएगा। कोलकाता की एक कंपनी को 30 माह में पुलों का काम पूरा करना होगा। पढ़ें पूरी खबर...

भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी नई रेल लाइन प्रोजेक्ट के दो महत्वपूर्ण बड़े पुलों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आरवीएनएल ने पुलों का 401.98 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर दिया है और इनका काम कोलकाता की एक कंपनी को सौंपा है। अनुबंध के अनुसार कंपनी को 30 माह में पुलों का काम पूरा करना होगा। आरवीएनएल ने बताया गया है कि यह अनुबंध अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के तहत किया गया है। निविदा 28 अक्तूबर 2024 को जारी हुई थी, जिसमें तकनीकी बोली तीन जनवरी 2025 और मूल्य बोली 1 अक्तूबर को खोली गई थी। निविदा के मूल्यांकन के बाद कोलकाता की कंपनी रॉयल इंफ्राकंस्ट्रू लिमिटेड को कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ बोलीदाता घोषित किया गया।

कंपनी को चेनिज 36+100 से 40+480 किलोमीटर के बीच दो बड़े पुलों की फाउंडेशन, सब-स्ट्रक्चर, सुपर-स्ट्रक्चर, रिवर ट्रेनिंग व प्रोटेक्शन वर्क, अस्थायी और संबद्ध कार्यों का निर्माण करना होगा। ये कार्य भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी नई रेल लाइन परियोजना के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताए गए हैं, जो आने वाले समय में पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच संपर्क को और मजबूत बनाएंगे। वहीं, सामरिक दृष्टि से बनाई जा रही यह परियोजना प्रदेश को प्रमुख यातायात से जोड़ेगी। आरवीएनएल के अनुसार, निर्माण कार्य 30 माह की अवधि में पूरा किया जाएगा और इसके बाद 180 दिनों की डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि होगी। यानी कार्य पूर्ण होने के बाद भी कंपनी को छह माह तक रखरखाव और गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी।

कंपनी से अनुबंध की शर्तों के तहत 17.03 करोड़ रुपये यानी कार्य मूल्य के पांच फीसदी की परफॉरमेंस सिक्योरिटी देने को कहा है, जो 28 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। साथ ही कंपनी को टैक्स अनुपालन, बीमा, बैंक विवरण, और जीएसटी नंबर आदि की जानकारी भी प्रस्तुत करनी होगी।

भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाइन को प्रदेश के लिए विकास की दृष्टि से ऐतिहासिक परियोजना माना जा रहा है। इस रेलमार्ग के निर्माण से न केवल पर्यटन और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रेल संपर्क देश के प्रमुख मार्गों से जुड़ जाएगा। बड़े पुलों के निर्माण से क्षेत्र की नदियों और घाटियों में ट्रैक बिछाने का कार्य गति पकड़ेगा।

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