Home Himachal News हिमाचल विधानसभा शीतकालीन सत्र; ओबीसी आरक्षण पर सत्ता–विपक्ष आमने-सामने, सदन में हंगामा

हिमाचल विधानसभा शीतकालीन सत्र; ओबीसी आरक्षण पर सत्ता–विपक्ष आमने-सामने, सदन में हंगामा

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तपोवन में हिमाचल की 14वीं विधानसभा का शीतकालीन सत्र के पहले दिन ओबीसी आरक्षण पर सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष में नोकझोंक हुई और हल्का-फुल्का भी हंगामा हुआ। पढ़ें पूरी खबर...

ओबीसी आरक्षण पर सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष में नोकझोंक हुई और हल्का-फुल्का भी हंगामा हुआ। स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए बैजनाथ के कांग्रेस विधायक किशोरी लाल ने भाजपा को ओबीसी विरोधी बताया तो भाजपा विधायकों ने इस टिप्पणी कड़ा विरोध किया। इस मुद्दे पर दोनों दल आमने-सामने हो गए।

बुधवार दोपहर बाद सदन में बैजनाथ के कांग्रेस किशोरी लाल ने नियम-67 के तहत चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि ओबीसी का आंकड़ा जुटाया जा रहा है तो इसलिए पंचायतों और स्थानीय निकायों के चुनाव करवाने में समय लग रहा है। इसमें भाजपा को क्या आपत्ति है, क्या भाजपा ओबीसी की विरोधी है। भाजपा नहीं चाहती कि ओबीसी को उचित आरक्षण मिलना चाहिए। किशोरी लाल ने कहा कि पहले आपदा प्रभावितों का पुनर्वास जरूरी है।

इस पर हस्तक्षेप करते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि किशोरी लाल 25 साल तक पंचायत के प्रधान रहे हैं। वह जमीन से जुड़े हुए नेता हैं। धरातल की परिस्थितियों और मुश्किलों को जानते हैं। इस पर विपक्ष के विधायक रणधीर शर्मा सदन में खड़े हो गए और इस टिप्पणी का विरोध करने लगे। रणधीर शर्मा ने कहा कि इसमें ओबीसी के विरोध की बात कहां से आ गई। चुनाव वैसे भी 2011 की जनगणना पर हो रहे हैं। इस बीच विपक्ष और सत्तापक्ष के विधायकों में नोकझोंक हुई और हल्का-फुल्का हंगामा होता रहा।

सदन में यह हंगामा उस वक्त हुआ, जब सदन में न तो मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू थे और न ही नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ही सदन में थे। इस नोकझोंक के बीच सभापति संजय रतन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने का अनुरोध करते रहे। सभापति ने इसके बाद बल्ह के भाजपा विधायक इंद्र सिंह गांधी को चर्चा में भाग लेने को कहा तो दोनों पक्ष शांत हुए। वहीं, बाद में चर्चा में भाग लेते हुए धर्मपुर के कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ने भी कहा कि ओबीसी का आरक्षण भी तय किया जाना है। ऐसी बातों को भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा में बहुत नुकसान हुआ है। यहां आपदा एक्ट लागू है तो इसे समझा जाना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के बीच में सदन से बाहर जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सीएम को सदन में उपस्थित होना जरूरी है, क्योंकि उनका जवाब भी आना है। यह व्यवस्था से जुड़ा हुआ प्रश्न है। इस पर पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि राजनीतिक लोगों की चार आंखें होती हैं। विपक्ष मुद्दे पर बात करने के बजाय इधर-उधर की बातें कर रहा है। थोड़ी ही देरी में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सदन में पहुंच गए।

सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा गुटाें में बंटी है। जयराम ठाकुर तनाव में हैं। नेता प्रतिपक्ष तनाव में जब रहते हैं तो कई चीजों पर तथ्यहीन बात करते हैं। चर्चा के बीच सीएम सुक्खू ने कहा कि विपक्ष के विधायक जो भी कमियां बता रहे हैं, उन्हें दुरुस्त किया जाएगा। पंचायतों में इससे सही लोग चुनकर आएंगे। सीएम सुक्खू ने कहा कि आपदा राहत के तहत पीडीएनए के तहत अभी तक 451 करोड़ रुपये का ही बजट आया है। भारत सरकार से पैसा लेना मुश्किल काम हो गया है। उन्होंने मंडी में सरकार के 11 साल का कार्यकाल पूरा होने पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रम पर कहा कि जिस आत्मनिर्भर हिमाचल की नींव रखी गई है उसके चलते वहां जश्न नहीं, बल्कि सरकार अपना दृष्टिकोण रखने जा रही है।

सदन में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू बार-बार पहाड़े की तरह पांच गुटों में भाजपा की बात करते हैं। उप मुख्यमंत्री सदन में नहीं आए हैं। अभी वह पूरे सत्र में नहीं रहेंगे, अन्य पर संशय है। भाजपा एकजुट और एकगुट है। जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान सरकार में मुख्यमंत्री और मंत्रियों की दिशाएं अलग-अलग हैं। वहीं, जयराम ठाकुर ने सदन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में इस बात को भी दोहराया कि मंडी में जश्न मनाने की बात का औचित्य सरकार अभी भी सिद्ध नहीं कर पाई है। जिन लोगों के घर उजड़ गए, उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इनका विजन ब्लर हो गया है, अब सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा है। व्यवस्था परिवर्तन के तीन साल का जश्न मनाने के लिए सरकार आपदा प्रबंधन के बजट का दुरुपयोग कर रही है।

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