Home Himachal News मेयर का कार्यकाल बढ़ाने पर दायर याचिका की सुनवाई 30 को, जानें...

मेयर का कार्यकाल बढ़ाने पर दायर याचिका की सुनवाई 30 को, जानें याचिकाकर्ता के तर्क

144
0
नगर निगम शिमला के महापौर के कार्यकाल को ढाई साल से पांच वर्ष बढ़ाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका दायर की गई है। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश सरकार ने जो महापौर के कार्यकाल को पांच वर्ष करने का अध्यादेश लाया है, वह सरासर महिलाओं के सांविधानिक अधिकारों का हनन करता है। पढ़ें पूरी खबर...

नगर निगम शिमला के महापौर के कार्यकाल को ढाई साल से पांच वर्ष बढ़ाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर अब हिमाचल हाईकोर्ट 30 दिसंबर को सुनवाई करेगा। सरकार की ओर से बताया गया कि मेयर का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर लाया गया अध्यादेश विधानसभा में पारित कर दिया गया है। मौजूदा परिस्थिति में अब यह याचिका सुनने योग्य नहीं रह गई है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि विधानसभा से पारित संशोधन को अभी तक राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिली है। लिहाजा स्थिति बदली नहीं है। इसके बाद प्रतिवादियों ने याचिका का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। इसमें मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने स्वीकार कर दिया।

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश सरकार ने जो महापौर के कार्यकाल को पांच वर्ष करने का अध्यादेश लाया है, वह सरासर महिलाओं के सांविधानिक अधिकारों का हनन करता है। यह जनहित याचिका एक महिला अधिवक्ता की ओर से दायर की गई है। उन्होंने याचिका में बताया है कि मौजूदा मेयर के कार्यकाल की समाप्ति पर किसी पात्र महिला को मेयर पद के लिए चयनित होने का मौका दिया जाना चाहिए था, मगर सरकार ने महिलाओं के सांविधानिक अधिकारों का हनन करने के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है।

शिमला नगर निगम के मेयर सुरेंद्र चौहान का ढाई साल का कार्यकाल बीते 15 नवंबर को समाप्त हो गया है और पुराने रोस्टर के हिसाब से एससी कोटे की किसी महिला की इस पद पर ताजपोशी तय थी। मगर सरकार ने अध्यादेश लाकर मेयर का कार्यकाल पांच साल कर दिया। इसी मामले में पार्षद आशा शर्मा, कमलेश मेहता और सरोज ठाकुर ने याचिकाकर्ता के रूप में वादी बनाने का आवेदन किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here