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हिमाचल में पानी को लेकर बड़ा कदम, भूजल दोहन पर रोक और वर्षा जल संचयन अनिवार्य

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प्रदेश में भूजल संरक्षण और उसके नियंत्रित उपयोग को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर हो गई है। इसके लिए सरकार ने कड़े प्रावधान लागू किए हैं।

हिमाचल प्रदेश में भूजल संरक्षण और उसके नियंत्रित उपयोग को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर हो गई है। इसके लिए सरकार ने कड़े प्रावधान लागू किए हैं। उद्योगों व संस्थानों के लिए नई शर्तें लागू की गई हैं। भूजल दोहन की अनुमति लेने वाले आवेदकों को अब वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) संरचना का निर्माण अनिवार्य रूप से करना होगा। यह व्यवस्था हिमाचल प्रदेश भूजल (विनियमन एवं विकास नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2022 के तहत लागू की गई है। नई शर्तों के अनुसार भूजल दोहन करने वालों को डिजिटल फ्लो मीटर व टेलीमेट्री सिस्टम लगाना होगा, जिससे किसी भी समय पानी की निकासी पर नजर रखी जा सके।

साथ ही उपयोग किए गए भूजल की मात्रा के आधार पर रॉयल्टी भी अदा करनी होगी। 10 घन मीटर प्रतिदिन से अधिक भूजल दोहन करने वाले संस्थानों को पायजोमीटर स्थापित करना अनिवार्य होगा और भूजल स्तर का मासिक डाटा संबंधित विभागों को भेजना होगा। वहीं 100 घन मीटर प्रतिदिन से अधिक पानी निकालने वाले उद्योगों को हर साल जल ऑडिट कराना होगा और अगले तीन वर्षों में कम से कम 20 प्रतिशत भूजल उपयोग घटाना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी क्षेत्र में भूजल की मात्रा या गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ता है तो अनुमति रद्द या सीमित की जा सकती है। इसके अलावा उद्योगों को जल पुनर्चक्रण, जल दक्ष तकनीक अपनाने और उपचारित पानी के पुनः उपयोग को भी बढ़ावा देना होगा।

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