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महाशिवरात्रि की अनोखी रीत: सात दिन घूंघट में छह देवियां, जलेब से दूरी

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देव समागम मंडी महाशिवरात्रि के अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में एक सप्ताह तक सभी देवियां राजमहल में रानियों के निवास स्थान रूपेश्वरी बेहड़े में घूंघट में वास करती हैं। जानें सदियों पुरानी परंपरा के बारे में...

देव समागम मंडी महाशिवरात्रि के अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में सदियों पुरानी परंपराओं को आज भी निभाया जा रहा है। 16 से 22 फरवरी तक चलने वाले इस महोत्सव के लिए हर बार की तरह इस बार भी छह नरोल देवियों को निमंत्रण भेजा गया है।

मां बगलामुखी, देवी बूढ़ी भैरवा पंडोह, देवी काश्मीरी माता, धूमावती माता पंडोह, देवी बुशाई राज माता कैहनवाल और रूपेश्वरी राजमाता न तो जलेब में शिरकत करेंगी और न ही पड्डल मैदान में होने वाले देव समागम का हिस्सा बनेंगी। महाशिवरात्रि महोत्सव के दौरान एक सप्ताह तक सभी देवियां राजमहल में रानियों के निवास स्थान रूपेश्वरी बेहड़े में घूंघट में वास करती हैं। रियासतकाल से चली आ रही देव समागम शिवरात्रि में रानियों से सखी प्रेम को नरोल देवियां आज भी निभा रही हैं। देवी बूढ़ी भैरवा मंदिर कमेटी के प्रधान नरेश कुमार ने कहा कि देवी घूंघट डालकर राजमहल में एकांत वास करती हैं।

मेले की समाप्ति पर निकलेंगी बेहड़े से बाहर: राजाओं की रियासतें नहीं रहीं, लेकिन देवियां महोत्सव में छोटी काशी मंडी में आती हैं, लेकिन मेले में शिरकत करने की बजाए रूपेश्वरी बेहड़े में घूंघट में ही विराजमान रहती हैं। मेले की समाप्ति पर ही सभी देवियां बेहड़े से बाहर निकल कर एक दूसरे से मिलने करने के बाद अगले वर्ष दोबारा मिलने का वादा कर अपने अपने स्थानों के लिए प्रस्थान करती हैं।

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