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हिमाचल का चौंकाने वाला खुलासा: LSD तस्करी में पुलिस की मिलीभगत? कुल्लू नेटवर्क पर बड़ा एक्शन

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राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह ने बताया कि एसटीएफ के चारों कर्मी आदतन अपराधी नहीं हैं।

एक करोड़ के एलएसडी नशे की तस्करी के मामले में निलंबित एसटीएफ के चारों पुलिस कर्मियों को बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एसटीएफ के इन चारों पुलिस कर्मियों को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया था। राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह ने बताया कि एसटीएफ के चारों कर्मी आदतन अपराधी नहीं हैं। उन्होंने जो अपराध किया है उसके लिए तुरंत निलंबित किया गया, गिरफ्तार किया गया, चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया। नशा तस्करी में संलिप्त कर्मियों को लेकर पुलिस विभाग की जीरो टॉलरेंस की नीति है। एसटीएफ के चारों पुलिस कर्मियों को बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे पहले पुलिस विभाग के 17 अन्य कर्मियों पर भी विभाग ने कार्रवाई की है।

 जिला शिमला में पकड़े गए एक करोड़ रुपये के नशीले पदार्थ एलएसडी के मामले से कुल्लू में कई साल से चल रहे नशा तस्करी के नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं। गोवा से तस्करी करके लाई गई एलएसडी को शिमला से पहले कुल्लू पहुंचाया गया था। वहां से ही एसटीएफ के चारों कर्मचारियों इस तस्करी में संलिप्तता की बात सामने आ रही है। चारों आरोपी पुलिस कर्मचारी कुल्लू में ही तैनात थे। इसके साथ ही एलएसडी जैसे जानलेवा नशे की तस्करी के मुख्य सप्लायर नविएल हैरिसन पर भी वर्षों से कुल्लू जिले में नशा तस्करी में संलिप्त होने के आरोप लग रहे हैं। अब शिमला पुलिस इस बात की छानबीन कर रही है कि आखिरकार एसटीएफ कर्मचारियों और नशा तस्करों के बीच की यह मिलीभगत कितनी पुरानी है। इस तरह से कुल्लू जिले समेत प्रदेश में कितने समय से इस जहर की अवैध तस्करी चल रही थी।

पुलिस की जांच अभी प्रारंभिक स्तर पर है और अभी मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों की संलिप्तता को लेकर सबूत जुटाए जा रहे हैं, लेकिन जिस तरह से एसटीएफ कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने नशा पकड़कर छोड़ दिया और इसके बाद एलएसडी शिमला पहुंच गई। इससे एसटीएफ की साख को भारी नुकसान पहुंचा है। पुलिस ने चारों एसटीएफ कर्मचारियों को शुक्रवार को अदालत के समक्ष पेश किया जहां से उन्हें चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। अब पुलिस ने इन चारों आरोपियों से पूछताछ कर पुलिस मामले में इनकी संलिप्तता को लेकर सवाल-जवाब करेगी। इस नशा तस्करी के नेटवर्क की परतों को भी उधेड़ने की भी कोशिश करेगी।

शिमला पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ ही उनके मोबाइल भी कब्जे में ले लिए हैं। अब पुलिस उनके मोबाइल से उनकी नशा तस्करी से जुड़े आरोपियों से संपर्क और अन्य सबूतों को जुटाने की कोशिश करेगी। इसके साथ ही संदीप, नविएल हैरिसन के पुलिस को दिए बयानों और एसटीएफ कर्मियों के बयानों को लेकर भी आकलन करेगी। नविएल हैरिसन, संदीप और प्रिया तीनों अभी न्यायिक हिरासत में हैं। एएसपी अभिषेक ने बताया कि अदालत ने चारों आरोपियों को 23 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है।

 स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के चार पुलिस जवानों को एलएसडी नशा तस्करी के मामले में शिमला पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इससे पहले दो जवान राज्य गुप्तचर विभाग और दो जवान थर्ड बटालियन पंडोह में तैनात थे। दो जवान कुल्लू की एसआईयू टीम में भी रह चुके हैं। कुल्लू सदर थाना के साथ भुंतर और मणिकर्ण थानों में भी सेवाएं दे चुके हैं। नशे की तस्करी में संलिप्तता मिलने के बाद चारों जवानों की हुई गिरफ्तारी से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। अब शिमला पुलिस चारों को निशानदेही के लिए कुल्लू जा सकती है। पुलिस अधीक्षक कुल्लू मदन लाल कौशल ने बताया कि शिमला पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए गए चारों पुलिस कर्मचारी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) हिमाचल प्रदेश इकाई बजौरा जिला कुल्लू में कार्यरत थे। पूर्व में ये पुलिस कर्मचारी जिला कुल्लू में कार्यरत थे। इन कर्मचारियों में से मुख्य आरक्षी समीर कुमार वर्ष 2024 को, मुख्य आरक्षी राजेश कुमार मई 2025 को जिला कुल्लू से राज्य गुप्तचर विभाग तथा मानक मुख्य आरक्षी नितेश कुमार व आरक्षी अशोक कुमार वर्ष 2021 को थर्ड आईआरबीएन पंडोह को स्थानांतरित हो गए थे। एसपी ने बताया कि वर्तमान में उपरोक्त सभी पुलिस कर्मचारी स्पेशल टास्क फोर्स मध्य क्षेत्र मंडी स्थित बजौरा में तैनात थे, ऐसे में गिरफ्तार किए गए चारों पुलिस कर्मचारी जिला पुलिस कुल्लू के अधीन नहीं थे।

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