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हाईकोर्ट के फैसले के आगे झुकी सरकार! अब इन कर्मचारियों की किस्मत बदली

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प्रदेश सरकार की ओर से वेतन नियमों में किए गए हालिया संशोधन के मद्देनजर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दायर एक अपील को वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया है।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से उन कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर आई है, जिनकी नियुक्ति 3 जनवरी 2022 से पहले हुई थी। प्रदेश सरकार की ओर से वेतन नियमों में किए गए हालिया संशोधन के मद्देनजर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दायर एक अपील को वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ को सूचित किया गया कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने 4 अप्रैल 2026 को एक नई अधिसूचना जारी की है। यह अधिसूचना हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2022 में संशोधन से संबंधित है।

इस संशोधन के तहत उन सभी कर्मचारियों को लाभ दिया गया है जिनकी नियुक्ति 3 जनवरी, 2022 से पहले हुई थी। अदालत को बताया गया कि इस मामले में प्रतिवादी की नियुक्ति 18 सितंबर, 2020 को अनुबंध के आधार पर हुई थी। चूंकि उनकी नियुक्ति सरकार द्वारा निर्धारित कट-ऑफ तारीख 3 जनवरी 2022 से पहले की है, इसलिए वह नए नियमों के तहत लाभ के हकदार बन गए हैं। इसी कारण सरकार ने इस कानूनी लड़ाई को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया। अदालत ने राज्य सरकार बनाम अशोक कुमार मामले से जुड़े अन्य सभी लंबित अपील और आवेदनों का भी निपटारा कर दिया गया है। सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि 3 जनवरी 2022 से पहले नियुक्त हुए हजारों कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

 प्रदेश हाईकोर्ट ने प्री-स्कूलों के पंजीकरण और विनियमन से जुड़े एक मामले में सुनवाई के दौरान अदालती कार्यवाही को बंद करने का आदेश दिया है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर संतोष जताते हुए यह निर्णय लिया। सरकार ने अदालत को 17 मार्च 2026 की अधिसूचना सौंपी। इसके माध्यम से सूचित किया गया कि हिमाचल प्रदेश अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन सेंटर (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2017 को अब आधिकारिक रूप से प्रकाशित कर दिया गया है। अदालत ने पाया कि पिछले निर्णय का पालन किया गया है, जिसके चलते निष्पादन कार्यवाही और सभी लंबित आवेदनों को समाप्त कर दिया गया। महिला एवं बाल विकास निदेशक की ओर से प्राप्त निर्देशों के आधार पर अदालत को बताया गया कि प्री-स्कूलों के संचालन से संबंधित नियमों को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। पिछली सुनवाई के दौरान सरकार ने आश्वासन दिया है कि नियमों की औपचारिक अधिसूचना एक सप्ताह के भीतर जारी कर दी जाएगी।

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