Home fraud नालागढ़ में बुजुर्ग दंपती के साथ ऐसा क्या हुआ कि खाते से...

नालागढ़ में बुजुर्ग दंपती के साथ ऐसा क्या हुआ कि खाते से निकल गए 72.10 लाख? 2 दिन तक चलता रहा पूरा खेल…

16
0
Oplus_131072
Oplus_131072



नालागढ़ (सोलन)। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ में साइबर ठगी का बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां शातिरों ने एक बुजुर्ग दंपती को दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनसे 72.10 लाख रुपये ठग लिए। दंपती ने डर के कारण शुरुआत में घटना की जानकारी किसी को नहीं दी,

लेकिन बाद में एक गलती से पूरा मामला सामने आ गया।
जानकारी के अनुसार, 5 सितंबर को दंपती के पास फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को एनआईए का चीफ प्रकाश अग्रवाल बताया। उसने दंपती से कहा कि वे एटीएस के रडार पर हैं और उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल केनरा बैंक में आतंकी गतिविधियों के लिए किया गया है।


शातिरों ने दंपती को डराया कि उनके परिवार की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इसके बाद उन्हें कथित मामले से बाहर निकालने का भरोसा दिया गया, लेकिन इसके बदले किसी को कुछ न बताने और उनकी मांगें पूरी करने को कहा गया।


दस्तावेज लेने के बाद मांगे लाखों रुपये
आरोपियों ने दंपती से बैंक खाते की जानकारी, आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज भी हासिल कर लिए। इसके बाद उन्हें सुरक्षा राशि के नाम पर 72 लाख 10 हजार रुपये जमा करने के लिए कहा गया।
शातिरों ने दंपती से एक आवेदन लिखवाया, जिसमें उन्हें वरिष्ठ नागरिक और बीमार होने की बात लिखने को कहा गया। साथ ही धमकी दी गई कि अगर उन्होंने किसी को इस बारे में बताया तो उन्हें कथित मामले से बाहर नहीं निकाला जाएगा।
डर के कारण दंपती नालागढ़ के पंजाब नेशनल बैंक पहुंचे और अपनी सभी एफडी तुड़वा दीं। इसके बाद शातिरों द्वारा बताए गए बैंक खाते में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी।


बैंक मैनेजर ने भी किया था सावधान
जब दंपती एफडी तुड़वाने बैंक पहुंचे तो बैंक प्रबंधक सौरभ मोक्टा को शक हुआ। उन्होंने करीब आधे घंटे तक दोनों को समझाया और चेतावनी दी कि वे साइबर ठगी का शिकार हो सकते हैं।
हालांकि, दंपती इतने डरे हुए थे कि उन्होंने बैंक प्रबंधक को बताया कि उन्हें किसी संपत्ति की खरीदारी करनी है। बार-बार समझाने के बावजूद उन्होंने 72.10 लाख रुपये शातिरों के खाते में जमा कर दिए।
एक गलती से खुल गया पूरा मामला


ठगी के बाद भी दंपती ने घटना को गुप्त रखा। इसी बीच हैकरों को भेजे जाने वाले दस्तावेजों से जुड़ा एक पत्र गलती से नालागढ़ के पेंशनर समूह में वायरल हो गया।
पत्र में दंपती ने खुद को हृदय रोगी बताते हुए मदद की गुहार लगाई थी। इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक नालागढ़ के सेवानिवृत्त प्रबंधक अश्वनी घई उनके घर पहुंचे। काफी समझाने के बाद दंपती ने पूरी घटना बताई।
अश्वनी घई ने बैंक को इसकी सूचना दी, लेकिन तब तक आरोपी पैसे को अलग-अलग खातों में इधर-उधर कर चुके थे।
दंपती ने अब पुलिस हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई है। मामले में साइबर ठगी करने वाले आरोपियों तक पहुंचने और रकम की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here