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शिमला के जाखू में पार्किंग निर्माण पर उठे सवाल! 44 लाख का काम अब 70 लाख तक पहुंचा, 20 फीट ऊंचे ढांचे ने बढ़ाया विवाद

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शिमला के ऐतिहासिक जाखू मंदिर के पास निर्माणाधीन स्टील पार्किंग इन दिनों सवालों के घेरे में आ गई है। नगर निगम की ओर से बनाई जा रही इस पार्किंग के निर्माण और बढ़ती लागत को लेकर पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। खास बात यह है कि छोटी गाड़ियों के लिए बनाई जा रही पार्किंग का ढांचा करीब 20 फीट ऊंचा है, जबकि सामान्य तौर पर यहां 8 से 10 फीट ऊंची गाड़ियां ही पहुंचती हैं।


पार्किंग का टेंडर करीब 44.84 लाख रुपये में हुआ था, लेकिन अब निर्माण पूरा करने के लिए 70.57 लाख रुपये की जरूरत बताई जा रही है। लागत बढ़ने और निर्माण की योजना को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।


नगर निगम ने जाखू मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों की सुविधा के लिए इस पार्किंग का निर्माण शुरू करवाया था। इसके लिए जाखू मंदिर प्रबंधन की ओर से 50 लाख रुपये दिए जाने की बात तय हुई थी। निगम ने करीब 49 लाख रुपये के प्रोजेक्ट का टेंडर करवाया, जिसमें ठेकेदार ने 44.84 लाख रुपये में काम करने की पेशकश की और उसे काम सौंप दिया गया।


निर्माण शुरू होने के बाद मौके पर स्टील का ढांचा तैयार किया गया, लेकिन काम पूरा होने से पहले ही निर्धारित राशि खत्म हो गई। इसके बाद ठेकेदार की ओर से काम पूरा करने के लिए करीब 70.57 लाख रुपये की लागत बताई गई।
नगर निगम का कहना है कि निर्माण के दौरान पार्किंग के डिजाइन में बदलाव करना पड़ा, जिसके चलते लागत बढ़ गई। अब तक खर्च हुए करीब 44 लाख रुपये में से मंदिर प्रबंधन की ओर से 24 लाख रुपये ही मिले हैं, जबकि बाकी राशि निगम ने लगाई है।


20 फीट ऊंचे ढांचे पर भी सवाल
पार्किंग की ऊंचाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जाखू मंदिर की ओर जाने वाली सड़क संकरी है और यहां मुख्य रूप से छोटी गाड़ियां ही पहुंचती हैं। ऐसे में छोटी गाड़ियों के लिए करीब 20 फीट ऊंचा ढांचा तैयार करने की जरूरत क्यों पड़ी, यह सवाल पार्षदों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी उठाया जा रहा है।
नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने भी पार्किंग के 20 फीट ऊंचे ढांचे का निरीक्षण किया है और इस पर हैरानी जताई है।
निगम की ओर से तर्क दिया गया है कि सड़क से पार्किंग को जोड़ने के लिए इसकी ऊंचाई बढ़ानी पड़ी। हालांकि, बढ़ी हुई लागत और निर्माण प्रक्रिया को लेकर अब जांच की मांग उठ रही है।


आयुक्त ने कही जांच और नियमों की बात
नगर निगम शिमला के आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि पार्किंग का निर्माण उनकी तैनाती से पहले का है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार किसी निर्माण में सामान्य तौर पर 10 फीसदी तक ही डेविएशन की अनुमति होती है। लागत इतनी क्यों बढ़ी, इसका जवाब संबंधित अधिकारी ही दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह के मामले सामने न आएं, इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पार्किंग का काम 44.84 लाख रुपये में शुरू हुआ था, तो इसकी लागत 70.57 लाख रुपये तक कैसे पहुंच गई और छोटी गाड़ियों के लिए 20 फीट ऊंचे ढांचे की जरूरत क्यों पड़ी? इन्हीं सवालों के चलते जाखू पार्किंग का निर्माण अब जांच और विवाद के दायरे में आ गया है।

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