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पहले साइबर ठगी, फिर रकम लौटाने का झांसा; हिमाचल में ठगों के नए जाल से रहें सावधान, ऐसे बनाते हैं दोबारा शिकार

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पूरी खबर:
शिमला। साइबर ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित को अक्सर सबसे ज्यादा उम्मीद अपने पैसे वापस मिलने की रहती है। लेकिन अब साइबर अपराधी इसी उम्मीद को अपना नया हथियार बना रहे हैं। हिमाचल में लोगों को सावधान किया गया है कि ठगी के बाद रकम वापस दिलाने का दावा करने वाला व्यक्ति खुद भी ठग हो सकता है।

पुलिस, बैंक अधिकारी या रिकवरी एजेंट बनकर करते हैं संपर्क

साइबर अपराधी पहले से ठगी का शिकार लोगों की जानकारी जुटाकर उनसे दोबारा संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए वे खुद को पुलिस अधिकारी, साइबर सेल कर्मचारी, बैंक अधिकारी, वकील या निजी रिकवरी एजेंट बताकर भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं।

इसके बाद पीड़ित से कहा जाता है कि उसकी फंसी हुई रकम वापस दिलाई जा सकती है। लेकिन रकम लौटाने की प्रक्रिया के नाम पर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स, कानूनी खर्च या सत्यापन शुल्क मांगा जाता है।

पहली ठगी की जानकारी बताकर जीतते हैं भरोसा

इस नए तरीके में ठग पीड़ित को उसकी पहली साइबर ठगी से जुड़ी जानकारी भी बता सकते हैं। उन्हें यह पता हो सकता है कि पीड़ित के साथ कब ठगी हुई, कितनी रकम गई या शिकायत कहां की गई थी।

ऐसी जानकारी सुनकर पीड़ित को लग सकता है कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में उसके मामले से जुड़ा है। इसके बाद ठग दस्तावेज, बैंक संबंधी जानकारी या किसी शुल्क के नाम पर दूसरी बार पैसे ऐंठने की कोशिश कर सकते हैं।

OTP और UPI PIN मांगने पर तुरंत हो जाएं सतर्क

ठग बैंक खाता सत्यापन के नाम पर बैंकिंग जानकारी मांग सकते हैं। कभी किसी लिंक पर क्लिक करने या कोई ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जा सकता है। कुछ मामलों में मोबाइल या कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लेने की कोशिश भी हो सकती है।

अगर कोई व्यक्ति OTP, UPI PIN, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी मांगता है तो ऐसी जानकारी बिल्कुल साझा न करें।

रकम वापस दिलाने वाले पर भी तुरंत भरोसा न करें

साइबर ठगी के बाद अगर कोई अनजान व्यक्ति खुद फोन करके पैसे वापस दिलाने का दावा करता है तो पहले उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। वह किस संस्था से जुड़ा है और उसका आधिकारिक संपर्क माध्यम क्या है, इसकी जांच करें।

अगर कोई व्यक्ति किसी निजी बैंक खाते में पैसे जमा कराने, संदिग्ध लिंक खोलने या तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाता है तो इसे गंभीर चेतावनी संकेत मानें।

ठगी होने पर तुरंत क्या करें?

अगर साइबर ठगी हो गई है तो समय बर्बाद किए बिना 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

बैंक लेनदेन से जुड़े UTR नंबर, ट्रांजेक्शन की जानकारी, मोबाइल नंबर, चैट, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें। ठगी के बाद दोबारा संपर्क करने वाले व्यक्ति को केवल इसलिए असली न मानें क्योंकि उसके पास आपकी पुरानी शिकायत या लेनदेन की जानकारी है।

अप्रैल 2026 से वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के मामलों में रकम की वापसी और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए मनी रेस्टोरेशन से जुड़ा मॉड्यूल भी शुरू किया गया है। इसलिए किसी निजी व्यक्ति या कथित रिकवरी एजेंट को पैसे देने के बजाय अधिकृत सरकारी व्यवस्था के माध्यम से ही शिकायत और कार्रवाई करें।

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