
हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश का कहर लगातार जारी है। लगातार जारी बारिश से जगह-जगह भूस्खलन, बाढ़ से लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। जनजातीय जिले किन्नौर के लिप्पा में शुक्रवार सुबह बादल फटने के कारण व्यापक नुकसान की सूचना है। बादल फटने से सेब के फलदार पौधों सहित मकानों को नुकसान हुआ है। बादल फटने के बाद दो मजदूर मलबे में फंस गए थे जिन्हें ग्रामीणों ने सुरक्षित बचा लिया। दोनों को उपचार के लिए रिकांगपिओ अस्पताल में भर्ती किया गया।
उधर, आनी के लोअर पटारना गांव में तीन मकान भूस्खलन की चपेट में आ गए। मकान में रह रही दो महिलाएं भी मलबे में दब गईं। बाद में एक का शव बरामद कर लिया गया लेकिन एक अन्य महिला अभी भी लापता है। भूस्खलन की चपेट में कुछ मवेशी भी आए हैं। राहत व बचाव कार्य जारी है। अधिकतर ग्रामीण सड़कें भूस्खलन से ठप हो गई हैं। खादवी गांव में भी तीन मकान भूस्खलन की चपेट में आए। वहीं रामपुर बुशैहर के पशाड़ा खड्ड के पास पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण एक वाहन क्षतिग्रस्त हुआ है।
राज्य में शुक्रवार सुबह 10:00 बजे तक भूस्खलन से दो नेशनल हाईवे सहित 635 सड़कें बंद रहीं। 1,333 बिजली ट्रांसफार्मर व 524 जल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हैं। मंडी, कुल्लू, चंबा व कांगड़ा जिले में सबसे अधिक सड़कें बंद हैं। उधर, लगातार पांच दिनों से बंद पड़ा किरतपुर-मनाली फोरलेन आखिरकार शुक्रवार सुबह लगभग 11:00 बजे बहाल कर दिया गया। पंडोह डेम, कैंची मोड़ और बनाला के पास रास्ता खोलने के बाद अब बड़ी और छोटी गाड़ियों को निकाला जा रहा है। गौरतलब है कि बीते दिनों दोनों जगह भूस्खलन के कारण हालात बेहद खराब थे। कैंची मोड़ पर फोरलेन का बड़ा हिस्सा धंस गया था और लगातार गिरते पत्थरों की वजह से बहाली कार्य शुरू करना जोखिम भरा साबित हो रहा था। साथ ही बनाला के पास फोरलेन पर बड़ा भूस्खलन होने से आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई थी। बीती रात को भी बारिश के चलते फिर इन दोनों स्थानों पर पत्थर गिरे। लेकिन जैसे ही सुबह मौसम ने थोड़ी राहत दी, प्रशासन और एनएचएआई की टीमों ने मलबा हटाने का काम शुरू किया और आखिरकार सुबह 11:00 बजे के करीब दोनों जगहों पर रास्ता खोल दिया गया।







