शिमला शहर में गरीबों के लिए बने आवासों पर फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है। आशियाना-2 ढली प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए मकान को एक सरकारी महिला कर्मचारी ने फर्जी बीपीएल प्रमाणपत्र के आधार पर हासिल कर लिया। नगर निगम शिमला की विभागीय जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद निगम ने ढली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई, जिस पर पुलिस ने महिला कर्मी संतोष कुमारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नगर निगम के अतिरिक्त एसई कम प्रोजेक्ट डायरेक्टर अभियंता धीरज कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि महिला सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद उसने बीपीएल प्रमाणपत्र बनवाकर गरीबों के लिए बने मकान पर कब्जा किया। नगर निगम ने उसे नोटिस जारी कर मकान खाली करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उसने पालन नहीं किया।
अब पुलिस जांच में यह भी खंगाला जाएगा कि किस तरह से नियमों के विरुद्ध उसे बीपीएल प्रमाणपत्र जारी किया गया, क्योंकि बीपीएल प्रमाणपत्र 35 हजार रुपये वार्षिक आय सीमा के साथ पटवारी और तहसीलदार के सत्यापन के बाद ही जारी हो सकता है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार के आशियाना-2 प्रोजेक्ट के तहत ढली में गरीब परिवारों के लिए 90 से अधिक आवास बनाए गए थे। वर्ष 2016 से 2020 के बीच इनका आवंटन हुआ। लेकिन समय-समय पर यह शिकायतें आती रहीं कि कई रसूखदार लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मकान हासिल कर लिए हैं। नगर निगम इन मामलों की जांच कर रहा है और अब यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है









