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आपदा को भूल दो दिन बाद लगेगा देव महाकुंभ, देवी-देवता कुल्लू के लिए हुए रवाना

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Kullu Dussehra: दो अक्तूबर से जिला कुल्लू के मुख्यालय ढालपुर मैदान में अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव मनाया जाएगा। जिसके लिए सोमवार को दूरदराज के इलाकों के देवी देवता अपने देवालयों से निकल चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर...

प्राकृतिक आपदा की मार झेल चुके कुल्लू में दो दिन बाद सबसे बड़ा देव महाकुंभ दशहरा उत्सव शुरू होने वाला है। आपदा को भूलकर देव समाज महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस बार 300 से ज्यादा देवी-देवताओं को कुल्लू दशहरा उत्सव के लिए न्योता दिया गया है। दो अक्तूबर से शुरू हो रहे उत्सव के लिए सोमवार को दूरदराज के इलाकों के देवी देवता अपने देवालयों से निकल चुके हैं। हालांकि, इस बार उत्सव में न तो बॉलीवुड गायकों की महफिल सजेगी और न ही विदेशी कलाकार अपनी संस्कृति की छटा बिखेरते नजर आएंगे। सात संध्याओं में हिमाचल के कलाकार ही रंग जमाएंगे। सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू को भी न्योता दिया गया है।

दशहरा उत्सव के लिए आउटर सिराज के देवता खुडीजल महाराज, कोट पझ़ारी, जोगेश्वर महोदव, कुईकंडा नाग और टकरासी नाग सोमवार सुबह अपने-अपने देवालय से पूरे लाव लश्कर के साथ कुल्लू के लिए रवाना हुए। उपरोक्त सभी देवताओं को पहला पड़ाव बंजार के अलग-अलग जगहों पर होगा। दोपहर करीब 2 बजे के आसपास खुडीजल और टकरासी नाग का जलोड़ी दर्रा में मिलन हुआ।

खुडीजल इस बार रघुपुर घाटी के गांव फनौटी व जलोड़ी दर्रा होकर आए हैं। इसे पहले देवता वाया गाड़ागुशैणी होकर आते थे। वहीं, खनाग से अधिष्ठाता कोट पझ़ारी सैकडों साल बाद आ रहे देवता कुईकंडा नाग भी दशकों बाद कुल्लू आ रहे हैं। ये सभी देवता 150 से 200 किमी दूर से आ रहे हैं। सोमवार को आउटर सराज आनी के साथ बंजार और सैंज इलाके से करीब 20 देवी देवता कुल्लू दशहरा को निकल पड़े हैं। सभी देवताओं की सुरक्षा की जिम्मा स्थानीय पुलिस थाना व चौकी की होगी। कारदार शेर सिंह ठाकुर, भागे राम राणा, अमर सिंह ने कहा कि देवता कुल्लू दशहरा में भाग लेने के लिए निकल गए हैं। कहा कि पहला पड़ाव बंजार में होगा उधर, बंजार से देवत शृंगा ऋषि भी अपने देवलुओं के साथ उत्सव के लिए निकल गए हैं।

भगवान रघुनाथ के सम्मान में मनाए जाने वाले कुल्लू दशहरा में इस बार आउटर सिराज यानी आनी-निरमंड से 16 देवता भाग लेंगे। इनमें खुडीजल महाराज, शमशरी महादेव, व्यास ऋषि, कोट पझारी, जोगेश्वर महादेव, कुईकंडा नाग, टकरासी नाग, चोतरु नाग और बिशलू नाग शामिल है। वहीं, निरमंड से देवता चंभू उर्टू, देवता चंभू रंदल, देवता चंभू कशोली, देवता शरशाई नाग, कुई कंडा नाग घाटू, भुवनेश्वरी माता दुराह, सप्तऋषि थंथल भी कई वर्षों से भाग ले रहे हैं।

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