

सतलुज नदी के बेसिन (जहां नदी का पानी एकत्रित होता है) में अचानक तीन साल से गाद की मात्रा बढ़ने से इसका जलस्तर बढ़ने लगा है। इससे सुन्नी क्षेत्र में नदी से सटे इलाकों में कटाव बढ़ा है, सड़कें टूटने लगी हैं और कई लोगों की जमीनें पानी में डूब गई हैं। बरसात के दिनों में इस क्षेत्र के कई इलाकों को खतरा बढ़ गया है। लोक निर्माण विभाग और एनटीपीसी की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिला प्रशासन ने कोल डैम प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ी योजना तैयार करने का फैसला लिया है। प्रशासन के अनुसार एनटीपीसी और लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट को आधार बनाकर भविष्य की योजना तैयार की जाएगी। रिपोर्ट का अध्ययन विशेषज्ञ से करवाया जाएगा। इसी कड़ी में जल्द ही सुन्नी में सतलुज नदी को डिसिल्ट करने यानि गाद हटाने को लेकर फिर से बैठक बुलाई जा रही है। सुन्नी क्षेत्र में सतलुज नदी को डिसिल्ट करने को लेकर उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में शुक्रवार को भी बैठक हुई।
इसमें एनटीपीसी और लोक निर्माण विभाग ने अपनी रिपोर्ट पेश की। बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी पंकज शर्मा सहित एसडीएम सुन्नी, एनटीपीसी के आला अधिकारी और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। आईआईटी रुड़की की टीम ने सतलुज नदी की गाद पर अध्ययन किया है। वर्ष 2014 से 2024 तक यह अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 से 2021 तक सिल्ट में कोई बदलाव नहीं आया। वर्ष 2021 के बाद सिल्ट में तेजी से बदलाव आया है।
जोन एक तत्तापानी में वर्ष 2022 में सिल्ट 7 हेक्टेयर और 2023 में 27 हेक्टेयर दर्ज हुई। जोन दो सुन्नी में वर्ष 2022 में 0.5 हेक्टेयर और 2023 में 10 हेक्टेयर रिकॉर्ड की गई। जोन तीन चाबा में वर्ष 2022 में 1.7 हेक्टेयर से वर्ष 2023 में 8 हेक्टेयर सिल्ट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक सुन्नी क्षेत्र में एकत्रित सिल्ट भवन निर्माण के लिए उपयुक्त बताई गई है। सही तरीके से सिल्ट की माइनिंग करने का सुझाव भी दिया गया है ताकि पानी के जलस्तर को कम किया जा सके। एनटीपीसी माइनिंग के लिए एनओसी राज्य सरकार को देने के लिए तैयार है।
लोक निर्माण विभाग ने कोल डैम बनने से सतलुज नदी के तल में आए बदलाव पर रिपोर्ट दी है। 30 मार्च 2015 में कोल डैम का निर्माण हुआ था। वर्ष 2018-19 में डैम के कारण नदी में जलस्तर बढ़ने से पहली बार चाबा हाइड्रो पॉवर को नुकसान पहुंचा था। इसका मरम्मत कार्य 2019 में पूरा कर लिया था। 2023 में फिर से चाबा ब्रिज पूरी तरह टूट गया। 15 करोड़ का नुकसान हुआ। इस साल 21 जुलाई को थली ब्रिज को पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ। 13 अगस्त को ब्रिज के रेजिंग डेक को नुकसान हुआ। इसकी मरम्मत के लिए करीब 8 करोड़ रुपये खर्च आएगा। शिमला मंडी सड़क को करीब 29 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है। रिपोर्ट में सतलुज में गाद में बढ़ोतरी होना, तटों का कटाव बढ़ना, सड़क का बह जाना और जमीनों का जलमग्न होना पाया है। रिपोर्ट के अनुसार जलस्तर में और बढ़ोतरी से अब तत्तापानी, सुन्नी और तत्तापानी कस्बों में पीएससी कैंटिलीवर ब्रिज जलमग्न हो सकता है।







