

शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। प्रदेश के 19 सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से औपचारिक रूप से संबद्ध हो गए हैं। 22 स्कूलों को इस माह के अंत तक संबद्धता प्राप्त हो जाएगी। इन स्कूलों ने एडवांस स्टेज पार कर ली है।
हिमाचल अब उन अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिन्होंने सरकारी स्कूलों को राष्ट्रीय शैक्षणिक मानकों से जोड़ा है। हमीरपुर, सुन्नी, काजा (स्पीति), मढ़ी, भवारना, सरकाघाट, अर्की, धनेटा, सिहुंता, जंजैहली, करोट, बड़ा, तलाई, धर्मपुर, पोर्टमोर, पांवटा साहिब, कानम, हरोली और मंडी स्कूल को सीबीएसई से संबद्धता मिल गई है। यह उपलब्धि सरस 6.0 ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से डिजिटल प्रक्रिया अपनाकर हासिल की गई। प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र से 100 स्कूलों में सीबीएसई का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाना है। 94 स्कूलों के संबद्धता से जुड़े सभी दस्तावेज सीबीएसई की वेबसाइट पर अपलोड हो चुके हैं।
अमलैहड़, ममलीग, दाड़लाघाट, नौहराधार, नालागढ़, हटवार, सरस्वतीनगर, करसोग, भोरंज, अंब, रिकांगपिओ, सांगला, गलोड़, नादौन, बंजार, बिलासपुर, रामपुर, फतेहपुर, शाहपुर, चंबा, सतौन और दुलैहड़ स्कूल ने फर्स्ट लेवल स्क्रूटनी और पार्ट-बी सबमिशन के चरण पूरे कर लिए हैं। इस माह के अंत तक इन स्कूलों को भी सीबीएसई की संबद्धता मिल जाएगी। शिक्षा निदेशालय में स्थापित सीबीएसई नोडल सेल के समन्वय से कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग और दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली के निर्देशन में विद्यालयों को निरंतर मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया। निदेशालय, जिला और स्कूल स्तर पर एक सशक्त मॉनिटरिंग एवं सपोर्ट मैकेनिज्म भी स्थापित किया जाएगा, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बताया कि यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता, प्रशासनिक दक्षता और सामूहिक प्रयासों का प्रमाण है। राज्य अब उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जो सरकारी विद्यालयों को राष्ट्रीय शैक्षणिक मानकों के अनुरूप ढालने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
सीबीएसई पाठ्यक्रम में बदले जाने स्कूलों के भवनों और विद्यार्थियों की वर्दी का रंग अलग होगा। इन स्कूलों में स्मार्ट कक्षाओं का बंदोबस्त करने के साथ के साथ-साथ मेस का प्रबंध भी किया जाएगा और विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाएगा।
इस स्कूलों में शिक्षकों का अलग सब कैडर बनेगा। मौजूदा शिक्षकों को सीबीएसई सब कैडर चुनने का विकल्प दिया जाएगा। प्रधानाचार्य, शिक्षक और गैर शिक्षण कर्मचारियों का चयन योग्यता, अकादमिक उत्कृष्टता और सह पाठ्यक्रम गतिविधियों में योगदान के आधार पर होगा। कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए मौद्रिक और गैर मौद्रिक दोनों प्रकार की प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना भी आरंभ की जाएगी।







