
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में मंगलवार को कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई, जिनमें पंचायतों के पुनर्गठन, परियोजना प्रभावितों को रोजगार, स्कूल विलय और प्लास्टिक प्रतिबंध जैसे मुद्दे शामिल रहे। अदालत ने विभिन्न मामलों में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए।
पंचायत पुनर्गठन मामले में चुनाव आयोग बना प्रतिवादी
ग्राम पंचायत घुरट के विभाजन और नई ग्राम सभा के गठन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य चुनाव आयोग को प्रतिवादी बनाने के निर्देश दिए।
सरकार की ओर से कहा गया कि पंचायतों का पुनर्गठन कानूनी प्रावधानों के तहत किया गया है, लेकिन अदालत ने पाया कि प्रस्तुत दस्तावेजों में प्रस्ताव की उत्पत्ति स्पष्ट नहीं है। इस पर सरकार को विस्तृत रिकॉर्ड पेश करने के लिए समय दिया गया।
इस मुद्दे से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर बुधवार को एक साथ सुनवाई होगी।
किन्नौर में परियोजना प्रभावितों को रोजगार पर जांच के आदेश
हाईकोर्ट ने किन्नौर जिले में सोरंग पावर परियोजना से प्रभावित परिवारों को रोजगार न मिलने के मामले में उपायुक्त को जांच के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने कहा कि पुनर्वास योजना के तहत प्रभावित परिवारों को रोजगार देना अनिवार्य था, लेकिन शिकायतें सामने आई हैं कि इसका पालन नहीं हुआ।
उपायुक्त को 12 सप्ताह के भीतर सभी पक्षों को सुनकर निर्णय लेने को कहा गया है।
कुल्लू में प्राथमिक स्कूल का विलय रद्द
कुल्लू जिले की राजकीय प्राथमिक पाठशाला ओल्वा का जीपीएस माटल में किया गया विलय हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है।
सरकार द्वारा विलय वापस लेने के लिखित आश्वासन के बाद कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया।
अब स्कूल फिलहाल स्वतंत्र रूप से संचालित होगा, हालांकि अगले शैक्षणिक सत्र में नामांकन के आधार पर पुनः समीक्षा की जाएगी।
प्लास्टिक बैग प्रतिबंध मामले में याचिका वापस
हिमालय ग्रीन कंपनी ने राज्य में प्लास्टिक बैगों पर लगे प्रतिबंध को चुनौती देने वाली अपनी याचिका वापस ले ली है।
अदालत ने पाया कि कंपनी ने केवल अधिसूचना को चुनौती दी थी, संबंधित कानून को नहीं।
कोर्ट ने कंपनी को नई याचिका दायर करने की अनुमति दे दी है।
जीएसटी नंबर न देने पर टेंडर याचिकाएं खारिज
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी शर्तों का पालन अनिवार्य है।
अदालत ने एक ठेकेदार की तीन याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि व्यक्तिगत आवेदन में साझेदारी फर्म का जीएसटी नंबर उपयोग नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने वन निगम के निर्णय को सही ठहराते हुए किसी भी प्रकार की पक्षपात या मनमानी से इनकार किया।
इन मामलों में हाईकोर्ट के निर्देशों से प्रशासनिक पारदर्शिता, कानूनी प्रक्रिया के पालन और प्रभावित लोगों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण संदेश गया है।








