

हिमाचल प्रदेश में नवंबर का महीना प्रशासनिक हलचल लेकर आने वाला है। राज्य सरकार ने लंबे समय से जिलों में तैनात उपायुक्तों (डीसी) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को बदलने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय से चर्चा कर कार्मिक विभाग इस संबंध में सूची बनाने में जुट गया है। फेरबदल नवंबर के दूसरे सप्ताह तक हो सकता है। सरकार का फोकस उन जिलों पर है जहां उपायुक्त और एसपी दो साल या उससे अधिक समय से कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब जिलों में नए ऊर्जा और दृष्टिकोण के साथ अधिकारी भेजे जाएंगे, ताकि विकास योजनाओं को समय पर लागू किया जा सके और प्रशासनिक तंत्र में नई सक्रियता आए।
प्रदेश के कुल 12 जिलों में से लगभग आधे जिलों में अधिकारी 2023 या उससे पहले से कार्यरत हैं। इन अधिकारियों के स्थानांतरण के साथ-साथ कुछ जिलों में प्रशासनिक प्रदर्शन और जनता से फीडबैक को भी आधार बनाया जा रहा है। अगले दो वर्षों की विकास योजनाओं को ध्यान में रखते हुए नियुक्तियां होनी हैं। राज्य सरकार ने अब तक के कार्यकाल में कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं को लेकर अफसरशाही ने क्या काम किया है। इसकी समीक्षा भी लगातार जारी है।
आगामी दो वर्षों में इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर मजबूत तरीके से लागू करने के लिए सरकार जिलों में ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति करना चाहती है, जो इन कार्यक्रमों को गति दे सकें और परिणाम दिखा सकें। कार्मिक विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे डीसी और एसपी के अलावा सचिवालय स्तर पर भी ऐसे अफसरों की सूची तैयार करें जो लंबे समय से एक ही विभाग में हैं। कई प्रशासनिक सचिवों के विभागों में फेरबदल की संभावना है। वित्त, शिक्षा, लोक निर्माण, स्वास्थ्य और उद्योग विभाग में बदलाव की संभावना सबसे अधिक बताई जा रही है। कुछ अधिकारी जिन्हें अब तक जिलों में अच्छा प्रदर्शन करने वाला माना गया है, उन्हें सचिवालय में जिम्मेदार पदों पर लाने की तैयारी भी है।
कांग्रेस सरकार का 11 दिसंबर को तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। इस मौके पर राज्य स्तर पर बड़े कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है, इसमें सरकार अपनी उपलब्धियों का ब्योरा जनता के सामने रखेगी। इस कार्यक्रम से पहले प्रशासनिक स्तर पर नई टीम बनाकर सरकार तीन साल की उपलब्धियों और दो साल के रोडमैप का संदेश देना चाहती है। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नवंबर के पहले सप्ताह में सभी विभागीय सचिवों और जिला प्रमुखों की समीक्षा बैठक होगी। उसी बैठक में जिलावार रिपोर्ट और प्रशासनिक प्रदर्शन पर चर्चा होगी। उसके बाद ही अंतिम रूप से फेरबदल सूची पर मुहर लगाई जाएगी।





