

हिमाचल प्रदेश में तीस वर्ष से अधिक आयु की 11 से 13 फीसदी आबादी मधुमेह रोग की चपेट में है। भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (आईसीएमआर) ने यह आंकड़े पेश किए हैं। इस रोग की चपेट में आ चुके रोगियों के अलावा 20 फीसदी तक के तीस वर्ष से अधिक आयु के लोग प्री डायबिटिक स्टेज में हैं। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि अब यह रोग बच्चों को भी लग रहा है।
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के चिकित्सक डॉ. मनीश ठाकुर ने बताया कि मधुमेह पहले तीस साल से अधिक आयु में ही होता था, मगर अब युवा और किशोरों में भी सामने आ रहा है। इसके कारण शारीरिक गतिविधियां जैसे मैदान में पसीना बहाने वाले खेलों को न खेलना, खान-पान और जीवनशैली में आया बदलाव, अधिक मीठा खाना, अनियमित नींद, तनाव और गर्भावस्था में मधुमेह जैसे जोखिम अधिक देखे जा रहे हैं। अब यह बीमारी अमीरों या बुजुर्गों की नहीं रह गई है। उनका कहना है कि टाइप-2 मधुमेह को रोका जा सकता है । इस पर हुए अनुसंधान बताते हैं कि लगातार जीवनशैली, खानपान और शारीरिक व्यायाम, खेलकूद की गतिविधियों में सक्रिय भाग लेने से मधुमेह के जोखिम को 58 फीसदी तक कम किया जा सकता है।
डॉ. मनीश ठाकुर ने कहा कहा कि मधुमेह रोग से बचा जा सकता है। इसके लिए शारीरिक गतिविधि वयस्कों के लिए सप्ताह में 150 मिनट व्यायाम, बच्चों के लिए रोज एक घंटे का आउटडोर खेल। रोज की सैर, आहार में मैदा और रिफाइंड अनाज की जगह साबुत अनाज और मिलेट्स खाना, मीठे और तले खाद्य पदार्थ कम खाना, मीठे पेय पदार्थों का सेवन कम करना, पूरी नींद लेना, तनाव को ध्यान या योग जैसी गहरी सांस जैसी तकनीकें अपनाना, रोज कम से कम आठ घंटे की नींद लेने से हार्मोनल संतुलन बना रहेगा और इससे डायबिटिज होने की संभावनाएं कम हो जाएंगी। यह जरूरी है कि हर व्यक्ति 30 वर्ष की उम्र पार करने पर साल में एक बार अपना शूगर लेवल की जांच करवाएं। जिसके परिवार में मधुमेह है, और जिन्हें मोटापा है, नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए।
रोज सक्रिय रहें, 30–45 मिनट टहलें, साइकिल चलाएं, योग करें, शारीरिक गतिविधि इंसुलिन संवेदनशीलता और मूड दोनों सुधारती है। समझदारी से खाएं, साबुत अनाज, मिलेट्स, फल और सब्जियां खाएं, रिफाइंड आटा, मीठे स्नैक और सॉफ्ट ड्रिंक्स कम करें। नींद तनाव पर रखें नियंत्रण, 7 से 8 घंटे की नींद लें, ब्लड शुगर, बीपी और वजन की नियमित मॉनिटरिंग करें। आंख, किडनी और पैर की वार्षिक जांच को न भूलें।- डॉ. मनीष ठाकुर, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, एआईएमएसएस चमियाना शिमला।
यह थीम मधुमेह नियंत्रण केवल ब्लड शुगर कम करने का नाम नहीं है। बल्कि संतुलित, खुशहाल और सम्मानजनक जीवन जीने का सिद्धांत है। वेल-बीइंग के स्तंभ शारीरिक स्वास्थ्य, भावनात्मक स्वास्थ्य, सामाजिक स्वास्थ्य, कार्यस्थल और जीवन-स्तर वेल-बीइंग है। 2025 का यह अभियान डायबिटीज एंड द वर्क प्लेस पर केंद्रित है।







