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हिमाचल की इस भर्ती पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख! अब अगला कदम क्या होगा? जानें पूरी खबर

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जेओए (लाइब्रेरी) भर्ती में देरी और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं करने पर सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक रिपोर्ट पेश नहीं करने पर 10 हजार रुपये का हर्जाना आईजीएमसी के पुअर पेशेंट ट्रीटमेंट फंड में जमा कराना होगा। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।

सरकारी स्कूलों में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (जेओए) लाइब्रेरी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी न होने और लगातार स्टेटस रिपोर्ट दाखिल न करने पर प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई तक सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं की, तो उत्तरदाता को 10 हजार की हर्जाना राशि जमा करानी होगी। यह हर्जाना राशि आईजीएमसी शिमला स्थित पुअर पेशेंट ट्रीटमेंट फंड में जमा करानी होगी। खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान जारी किए गए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को तय की है।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से भर्ती में लगातार की जा रही देरी पर असंतोष जताया है। अदालत ने 2025 में सहायक लाइब्रेरियन के खाली पदों को परिवर्तित कर जेओए (लाइब्रेरी) का नया कैडर बनाने और उनके भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को 6 महीने के भीतर अंतिम रूप देकर प्राथमिकता के आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे। कुल 771 पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाना था, जिसमें से 235 पदों के लिए सरकार से अनुमति मिली थी। शिक्षा विभाग में जेओए (लाइब्रेरी) के 400 पदों को भरने के लिए वित्त विभाग ने 3 मई 2024 को सहमति दी थी। प्रथम चरण में 100 स्कूलों में नियुक्तियां की जानी थी। 2 जुलाई 2025 को हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग को 78 पद, विशेष रूप से सक्षम/अल्पसंख्यक मामले निदेशालय को 4 पद, युवा सेवाएं एवं खेल विभाग को 3 पद तथा सैनिक कल्याण कार्यालय को 15 पद भरने के लिए अधियाचना भेजी गई।

कार्मिक विभाग की 14 मई और 19 जुलाई 2025 की एंगेजमेंट स्कीम के तहत भर्ती को लेकर फिर से संशय जताया गया। अदालत ने सख्त लहजे में टिप्पणी की थी कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सरकार इस मामले को लगातार अटका रही है। इसी सिलसिले में हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव से जवाब मांगा था कि भर्ती को अंतिम अंजाम तक पहुंचाने में देरी क्यों हो रही है और अब तक क्या कार्रवाई की गई है, लेकिन इस पर अभी तक कोई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है।

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