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पहली बार रोबोटिक तकनीक से मलाशय कैंसर का सफल ऑपरेशन, चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि

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अत्याधुनिक तकनीक से डॉक्टरों की टीम ने राज्य की पहली रोबोटिक मलाशय (रेक्टम) कैंसर सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा कर चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है।

हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा इतिहास में टांडा मेडिकल कॉलेज ने एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। अत्याधुनिक तकनीक से डॉक्टरों की टीम ने राज्य की पहली रोबोटिक मलाशय (रेक्टम) कैंसर सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा कर चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि न सिर्फ टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि राज्य के कैंसर मरीजों के लिए नई उम्मीद भी लेकर आई है। यह सर्जरी नूरपुर की 51 वर्षीय महिला मरीज की गई, जो लंबे समय से इस कैंसर से जूझ रही थीं।

यह जटिल रोबोटिक प्रक्रिया डॉ. अंकित शुक्ला (गैस्ट्रो सर्जन) और डॉ. महेंद्र राणा (मिनिमल एक्सेस, लैप्रोस्कोपिक व रोबोटिक सर्जन) ने अपनी टीम के साथ मिलकर पूरी की। सर्जरी के बाद मरीज की हालत सामान्य है और डॉक्टरों को उनके शीघ्र स्वस्थ होने की उम्मीद है। डॉ. राणा के अनुसार कैंसर के मामलों में रोबोटिक सर्जरी को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि यह पारंपरिक सर्जरी की तुलना में अधिक सटीकता, बेहतर दृश्यता और कम रक्तस्राव के साथ बेहतर लिम्फ नोड डिसेक्शन प्रदान करती है।

टांडा मेडिकल कॉलेज अब तक रोबोटिक तकनीक की मदद से 30 से अधिक सर्जरी कर चुका है, जिनमें पेंक्रियाज, हर्निया और स्त्री रोग संबंधी जटिल ऑपरेशन शामिल हैं। कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मिलाप शर्मा और उप मुख्य सचेतक व विधायक केवल सिंह पठानिया ने इस उपलब्धि पर टीम को बधाई दी है।

मलाशय (रेक्टम) बड़ी आंत का अंतिम हिस्सा होता है। जब इसकी कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर बनता है, तो इसे रेक्टम कैंसर कहा जाता है। इसके लक्षणों में मल त्याग की आदतों में बदलाव, मल में खून आना, पेट दर्द, वजन कम होना और थकान शामिल हैं। इसके निदान के लिए कोलोनोस्कोपी, एमआरआई, सीटी स्कैन और बायोप्सी की जाती है। उपचार में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन और लक्षित दवा चिकित्सा शामिल रहती है।

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