

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के नौवें दिन हंगामे के बीच प्रदेश में बादल फटने, भारी बारिश-भूस्खलन से हुई तबाही को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। अब इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। प्रस्ताव पर विपक्ष ने सत्ता पक्ष के साथ हां में हां मिलाई, लेकिन जब इस पर जवाब देने के लिए राजस्व मंत्री खड़े हुए तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। भाजपा के सभी विधायक नारेबाजी करते हुए वेल में चले गए। इससे पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष ने हिमाचल में राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे केंद्र सरकार को भेजने पर सहमति जताई।
संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन चौहान ने नियम 102 के तहत राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव सदन में लाया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने उनके क्षेत्रों में हुए नुकसान की जानकारी दी। आपदा पर चर्चा खत्म होने के बाद जब राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी आपदा से नुकसान और सरकार की ओर से किए गए प्रबंधों के बारे में जानकारी देने के लिए खड़े हुए तो विपक्ष ने उनका विरोध कर नारेबाजी की। शोर-शराबे के बीच राजस्व मंत्री नुकसान और राहत व बचाव कार्यों की जानकारी देते रहे। इसी बीच, विपक्ष के विधायक वेल में पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि विपक्ष के लोग आपदा पीड़ितों के साथ नहीं हैं। भाजपा विधायकों ने हिमाचल में राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के प्रस्ताव का समर्थन किया और अब यह लोग सुनने को तैयार नहीं। विपक्ष के सदस्य कह रहे हैं कि आपदा प्रभावित लोग भूख से मर रहे हैं, यह बिल्कुल गलत है। सभी को राशन पहुंचाया जा रहा है। भरमौर में सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। 2023 में केंद्र को आपदा राहत पैकेज जारी करने का प्रस्ताव भेजा था। इन लोगों ने दिल्ली जाकर इसे रोका। अब इस प्रस्ताव को भी केंद्र में जाकर रोकने का प्रयास करेंगे।







