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क्या अब हिमाचल में बाढ़ का खतरा होगा कम? सरकार ने लिया ऐसा फैसला, जो बदल सकता है सब कुछ… जानें पूरी खबर

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बाढ़ और बढ़ते जलस्तर से पुलों को सुरक्षित बनाने के लिए हिमाचल सरकार ने पुराने पुलों को चरणबद्ध तरीके से ऊंचा करने का फैसला लिया है। इसकी शुरुआत शिमला के सुन्नी क्षेत्र में सतलुज नदी पर बने पुल से होगी, जिस पर 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा ब्यास, रावी और अन्य नदियों के पुलों का तकनीकी सर्वेक्षण कर जरूरत के अनुसार उनका पुनर्निर्माण या ऊंचाई बढ़ाई जाएगी।

हिमाचल प्रदेश में बरसात के दौरान नदियों के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ से पुलों को होने वाले नुकसान को देखते हुए सरकार ने सतलुज सहित अन्य प्रमुख नदियों पर बने पुराने पुलों को चरणबद्ध तरीके से ऊंचा किया जाएगा। इस दिशा में पहली बड़ी पहल शिमला जिले के सुन्नी क्षेत्र में सतलुज नदी पर बने पुल से की जा रही है। यहां पुल को लगभग 20 मीटर तक ऊंचा करने का कार्य शुरू हो गया है, जिस पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

हाल के वर्षों में मानसून के दौरान कई स्थानों पर नदियों का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा है। तेज बहाव के कारण पुलों के पिलरों पर दबाव बढ़ने के साथ मलबा और बड़े-बड़े पत्थर फंस जाते हैं, जिससे पुलों को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बना रहता है। ये पुल कई बार नदी में पानी के बहाव के चलते ढह गए। इससे पुलों पर यातायात भी प्रभावित हुआ है। इसी अनुभव को देखते हुए सरकार और लोक निर्माण विभाग ने पुराने पुलों की संरचना को अधिक सुरक्षित बनाने का निर्णय लिया है।

सुन्नी पुल को ऊंचा करने के लिए मौजूदा ढांचे में तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में बाढ़ के दौरान नदी का बहाव बिना किसी रुकावट के निकल सके। पुल की ऊंचाई बढ़ने से जलस्तर बढ़ने पर भी पुल के ऊपर पानी आने की आशंका काफी कम होगी और यातायात बाधित नहीं होगा। लोक निर्माण विभाग अब सतलुज के अलावा ब्यास, रावी और अन्य प्रमुख नदियों पर बने पुराने पुलों का भी तकनीकी सर्वेक्षण कर रहा है। जिन पुलों पर भविष्य में बाढ़ का खतरा अधिक पाया जाएगा, उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से ऊंचा किया जाएगा या आवश्यकता पड़ने पर नए मानकों के अनुरूप पुनर्निर्मित किया जाएगा।

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा और अचानक आने वाली बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे पुराने मानकों के आधार पर बने पुल भविष्य की परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त सुरक्षित नहीं रह गए हैं। इसी कारण अब नए पुलों के साथ-साथ पुराने पुलों को भी आधुनिक तकनीकी मानकों के अनुसार मजबूत और अधिक ऊंचाई वाला बनाया जा रहा है।

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