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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के एम्स बिलासपुर में कैंसर के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा की दिशा में एक बड़ी तैयारी की जा रही है। संस्थान में ऐसी अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें मरीज के शरीर की अपनी रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं को कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किया जाएगा। इसे CAR-T थेरेपी कहा जाता है।
इस थेरेपी में मरीज के शरीर से टी-कोशिकाएं निकालकर उन्हें प्रयोगशाला में इस तरह तैयार किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला कर सकें। इसके बाद इन तैयार कोशिकाओं को दोबारा मरीज के शरीर में पहुंचाया जाता है। एम्स बिलासपुर में अगले एक-दो वर्षों में इस तरह की अत्याधुनिक चिकित्सा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
बोन मैरो और लिवर ट्रांसप्लांट की भी तैयारी
CAR-T थेरेपी के साथ एम्स बिलासपुर में बोन मैरो और लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा विकसित करने की भी योजना है। संस्थान में रोबोट की मदद से आर्थोपेडिक सर्जरी की सुविधा पहले से शुरू हो चुकी है और अब रोबोटिक सर्जरी को और आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
पूरे हिमाचल के लिए बनेगा रेफरल सेंटर
एम्स बिलासपुर में अत्याधुनिक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र विकसित करने की भी योजना है। यह केंद्र केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे हिमाचल के मरीजों के लिए रेफरल, मार्गदर्शन और समन्वय केंद्र के तौर पर काम करेगा। दूरदराज के क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से जोड़ने के लिए टेलीकेयर नेटवर्क भी विकसित किया जाएगा।
शोध सुविधाओं का भी होगा विस्तार
संस्थान की केंद्रीय शोध प्रयोगशाला का विस्तार किया जाएगा। इसके तहत बीएसएल-3 स्तर की विशेष प्रयोगशाला और एनिमल बीएसएल-3 सुविधा विकसित करने की योजना है, जहां गंभीर संक्रमण और उपचार से जुड़े वैज्ञानिक शोध किए जा सकेंगे। हिमाचल की स्वास्थ्य जरूरतों से जुड़े शोध और स्वदेशी चिकित्सा तकनीक विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
एम्स बिलासपुर के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा के अनुसार, अगले दो वर्षों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट, लिवर ट्रांसप्लांट, CAR-T थेरेपी, सटीक उपचार की नई पद्धतियों और रोबोटिक सर्जरी जैसी क्षमताएं विकसित करने का लक्ष्य है।








