

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी ने शोध समेत विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य कर फिर नया मुकाम हासिल किया है। राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) 2025 की रैंकिंग में ऑलओवर के साथ इंजीनियरिंग श्रेणी में आईआईटी मंडी ने 58वीं और इंजीनियरिंग में 26वीं रैंक हासिल की। ऑलओवर और इंजीनियरिंग श्रेणी रैंकिंग में आईआईटी मंडी के तीन वर्षों की मेहनत इस बार रंग लाई है। 2025 की रैंकिंग में तीन वर्षों में शोध, प्रशिक्षुओं की संख्या बढ़ना, इंफ्रास्ट्रक्चर समेत अन्य चीजों में बढ़ोतरी हुई है। आईआईटी की कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट में भी भागीदारी बढ़ी है। आउटरीच गतिविधियां बढ़ी हैं। पिछले तीन साल में आईआईटी मंडी में कई नए और बड़े प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू हुआ है। इसी के साथ इस साल आईआईटी के इतिहास में सबसे अधिक यूजी प्रशिक्षु भी पंजीकृत हुए हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर आईआईटी मंडी की रैंकिंग तय हुई है। उधर, आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार डाॅ. केएस पांडे ने बताया कि निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा के नेतृत्व में संस्थान आगे बढ़ रहा है।
2025 58 54.52
2024 72 51.68
2023 73 49.03
2022 43 51.05
2021 82 43.93
2020 67 45.56
2019 44 49.40
2017 37 45.62
2025 26 62.08
2024 31 59.86
2023 33 56.49
2022 20 60.43
2021 41 52.58
2020 31 54.17
2019 20 56.00
2018 26 51.28
2017 28 50.60
2016 20 70.32
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचा (एनआईआरएफ) 2025 की रैंकिंग की तीन श्रेणियों में डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी को स्थान मिला है। देशभर में कृषि, वानिकी और पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों में नौणी 12वां स्थान पर रहा। कृषि और इससे संबंधित क्षेत्रों के श्रेणी में देशभर 20वां स्थान हासिल किया है। 2024 में 54.67 अंक से बढ़कर 2025 में 55.53 अंक प्राप्त किए हैं। 17 मानकों में से विवि ने 9 मानकों में सुधार किया है और चार मानकों में पूर्ण अंक बनाए रखे हैं। यह सुधार मुख्यत: छात्र संख्या, प्राध्यापकों की योग्यता और अनुभव, शोध प्रकाशन, प्रकाशनों की गुणवत्ता, क्षेत्रीय विविधता और धारणा जैसे मानकों में बेहतर प्रदर्शन के कारण हुआ है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि विश्वविद्यालय इन रैंकिंग में लगातार अच्छा प्रदर्शन करता रहा है, जो बागवानी और वानिकी के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार कार्यों के प्रति इसकी सतत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कई मानकों में हमारे कुल अंकों में सुधार हुआ है, जो विवि की ओर से किए जा रहे सकारात्मक कार्यों को दर्शाता है।
हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय शिमला घंडल को एनआईआरएफ रैंकिंग में विधि संस्थानों की श्रेणी में 34वां स्थान मिला है। कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने कहा कि विश्वविद्यालय ने कम समय में ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। यह रैंकिंग भारत में शैक्षणिक गुणवत्ता और संस्थागत प्रदर्शन के लिए एक प्रमुख मानदंड है। यह मान्यता कानूनी शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में एचपीएनएलयू शिमला की बढ़ती प्रतिष्ठा को रेखांकित करती है। उन्होंने इसके लिए छात्रों और स्टाफ को बधाई दी।
कृषि विवि पालमपुर की इस बार आईएनआरएफ की जारी सूची में रैकिंग कम हो गई है। हर बार अपनी रैकिंग में सुधार करने वाला कृषि विवि पालमपुर इस बार इस सूची में 19वें स्थान से खिसक कर 29वें नंबर पर पहुंच गया है। विवि 10 अंक नीचे खिसका है। सूत्रों की मानें तो कृषि विवि की रैकिंग गिरने का कारण स्टाफ की कमी को माना जा रहा है। स्टाफ की कमी के कारण विवि में इस बार प्रोजेक्ट भी कम आए। बजट का अभाव और स्टाफ की कमी रैंकिंग में कम होना बड़ा कारण बताया गया है। कृषि विवि की बात करें तो बजट के अभाव में इस बार विवि के स्टाफ को कई बार वेतन भी समय पर नही मिला है। इसे लेकर कर्मचारियों ने प्रदेश सत्कार के खिलाफ भी कई बार नाराजगी जताई है। प्रदेश सरकार की ओर से विवि की 112 हेक्टेयर जमीन को पर्यटन गांव के नाम करने को लेकर भी विवि के शिक्षक, गैर शिक्षक और विद्यार्थियों में रोष फैला रहा। इसे लेकर विवि में कई बार आंदोलन हुए। पढ़ाई बाधित हुई, जबकि स्टाफ की कमी को लेकर विवि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी कई बार अपना मुद्दा उठाती रही है। हालांकि, विवि अब तक शिक्षा, शोध में अच्छा कार्य करता रहा है। विवि की घटी रैंकिंग को लेकर कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।





