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शिमला-ठियोग-हाटकोटी सड़क विवाद—हाईकोर्ट ने SE पर लगाया जुर्माना, जानें क्या कहा अदालत ने

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग शिमला-ठियोग-हाटकोटी पर झूठा हलफनामा दायर करने को लेकर अधिकारियों पर कड़ी फटकार लगाते हुए टिप्पणी की कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग शिमला-ठियोग-हाटकोटी पर झूठे शपथ पत्र दाखिल करने पर अधीक्षण अभियंता पर 10 हजार रुपये का टोकन जुर्माना लगाया है। अदालत ने यह राशि उन्हें व्यक्तिगत रूप से मुख्य न्यायाधीश आपदा राहत कोष में जमा करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने झूठा हलफनामा दायर करने को लेकर अधिकारियों पर कड़ी फटकार लगाते हुए टिप्पणी की कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि वास्तविक स्थिति के बारे में कोर्ट के सामने सही तस्वीर पेश नहीं की गई है। मौजूद अधिकारियों ने इसके लिए कोर्ट से क्षमा मांगी और कहा कि उनका इरादा अदालत को गुमराह करने का नहीं था।

अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सचिव की ओर से 7 अक्तूबर को प्रस्तुत उस रिपोर्ट पर भी गौर किया, जिसमें उन्होंने ठियोग से शिमला तक राष्ट्रीय राजमार्ग का निरीक्षण किया था। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि सड़क के अधिकतम हिस्से में अनगिनत गड्ढे हैं, जिनमें से कुछ पानी से भरे थे, जबकि अन्य को अस्थायी रूप से छोटे कच्चे पत्थरों और कंक्रीट से ढका गया था। रिपोर्ट में कहा गया कि केवल ठियोग बाईपास से ठियोग तक बाईपास सड़क अच्छी स्थिति में है और उसे मामूली मरम्मत की आवश्यकता है।

अधीक्षण अभियंता ने पिछली सुनवाई के आदेश के अनुसार कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर एक हलफनामा दाखिल किया। हलफनामे में उन्होंने कहा कि पिछली बार तकनीकी पहलुओं की गलतफहमी और जल निकासी और सड़क की सतह के बीच भ्रम के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों की वास्तविक स्थिति को ठीक से नहीं दर्शाया जा सका था। उन्होंने अदालत को बताया कि यह त्रुटि जानबूझकर नहीं हुई थी। अधीक्षण अभियंता ने अपने नए अनुपालन हलफनामे में बताया कि वर्षा आपदा से प्रभावित उन हिस्सों को बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं जो दोष दायित्व अवधि (डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड ) के तहत है। शपथ पत्र में बताया गया है कि ठेकेदारों को तत्काल मरम्मत कार्य और सड़कों की स्थिति को दुरुस्त करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।


अदालत ने माना कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सचिव की रिपोर्ट पिछली तारीख को की गई न्यायालय की प्रथम दृष्टया टिप्पणियों को सही ठहराती है कि अधिकारी ने सही जानकारी नहीं दी थी। अदालत ने डीएलएसए सचिव के प्रयासों की सराहना की और उनसे एक बार फिर सड़क का निरीक्षण करने और रिपोर्ट देने का अनुरोध किया। अदालत ने कहा है कि अब संलग्न की गई तस्वीरें वास्तविक स्थिति दर्शाती हैं या नहीं और मरम्मत का काम ठीक तरीके से हो रहा है या नहीं। इस पर अदालत को अवगत कराया जाए। अदालत ने केंद्र सरकार को भी अगली तारीख तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 दिसंबर को होगी।

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