Home Education निजी बसों में भी मान्य होंगे विद्यार्थियों के रियायती पास—CM सुक्खू

निजी बसों में भी मान्य होंगे विद्यार्थियों के रियायती पास—CM सुक्खू

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प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी बसों में भी विद्यार्थियों के रियायती पास मान्य करेंगे। बस पास बनाने की प्रक्रिया जारी है। करीब 20 हजार विद्यार्थियों ने पास बनवा लिए हैं।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जल्द ही हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में युक्तिकरण होगा। बसों और स्टाफ की जरूरत के हिसाब से अलॉटमेंट होगी। मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी बसों में भी विद्यार्थियों के रियायती पास मान्य करेंगे। बस पास बनाने की प्रक्रिया जारी है। करीब 20 हजार विद्यार्थियों ने पास बनवा लिए हैं। 200 रुपये में एक साल के लिए पास बन रहे हैं। प्रक्रिया पूरी होते ही पता चल जाएगा कि कितने विद्यार्थियों को लाभ दिया जाना है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्राइवेट और सरकारी बसें चलाने के लिए एक संयुक्त नीति बनाने का एलान भी किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल में निजी बस ऑपरेटरों को 435 रूट आवंटित किए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में बसों की कमी नहीं होने देंगे।

विधानसभा में कांग्रेस विधायक संजय अवस्थी के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन हजार बसें होने के बावजूद एचआरटीसी घाटे में है। सरकार को प्रतिवर्ष 780 करोड़ की ग्रांट देनी पड़ रही है। एचआरटीसी में रोजाना वेतन और पेंशन के लिए प्रदर्शन होते हैं, ऐसे में अब युक्तिकरण की जरूरत है। कुछ रूट भी निजी क्षेत्र में दिए जाएंगे। जिन डिपो में सरप्लस स्टाफ और बसें हैं, उन्हें अन्य जगह भेजा जाएगा। अर्की के कंधर-बग्गा से दिल्ली जाने वाली बस को चंडीगढ़ के आगे नहीं भेजा जाता। चंडीगढ़ से और कई बसें दिल्ली के लिए मिल जाती हैं। अभी कई रूट ऐसे हैं जहां बसों और मानव संसाधन की जरूरत से अधिक तैनाती है। कुछ ग्रामीण इलाकों में सेवाएं सीमित हैं, ऐसे असंतुलनों को दूर करने के लिए सरकार विस्तृत अध्ययन कर रही है और आवश्यकता के आधार पर युक्तिकरण किया जाएगा।

सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार एक ऐसी समग्र परिवहन योजना तैयार कर रही है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी और निजी दोनों बस ऑपरेटरों को समन्वय के साथ सेवाएं प्रदान करने का अवसर मिलेगा। इसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग के माध्यम से बेहतर सेवाएं सुनिश्चित करना है।

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