Home Education हिमाचल में स्कूलों पर नई सख्ती… किन पर पड़ेगा सीधा असर?

हिमाचल में स्कूलों पर नई सख्ती… किन पर पड़ेगा सीधा असर?

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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से शुक्रवार को राजपत्र में अधिसूचित बाल्यावस्था देख-रेख और शिक्षा केंद्र (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) नियम 2026 के तहत अब बिना पंजीकरण कोई भी केंद्र नहीं चल सकेगा।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्री प्राइमरी स्कूल/डे-केयर के संचालन को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से शुक्रवार को राजपत्र में अधिसूचित बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा केंद्र (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) नियम 2026 के तहत अब बिना पंजीकरण कोई भी केंद्र नहीं चल सकेगा। छोटे बच्चों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मानक आधारित शिक्षा व देख-रेख उपलब्ध करवाने के लिए यह नियम तय किए गए हैं।

नए नियमों के तहत सभी प्री प्राइमरी स्कूलों को ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा। इसके लिए सरकार एक माह के भीतर पोर्टल विकसित करेगी। पंजीकरण के लिए 15,000 रुपये फीस तय की गई है। इसमें 5,000 रुपये प्रोसेसिंग और 10,000 रुपये पंजीकरण फीस शामिल होगी। आवेदन खारिज होने पर 10,000 रुपये वापस मिलेंगे। निरीक्षण के बाद ही प्रमाण पत्र जारी होंगे। पंजीकरण प्रक्रिया को तीन स्तरों पर रखा गया है।

पहले जिला कार्यक्रम अधिकारी जांच करेंग। फिर निरीक्षण समिति की ओर से स्थल निरीक्षण होगा। इसके बाद निदेशालय स्तर की समिति द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि सभी मानकों को पूरा किया गया तो ही प्रमाण-पत्र जारी होगा, अन्यथा आवेदन रद्द किया जा सकता है। यदि किसी नए केंद्र के पास पूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो उसे 6 महीने के लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन दिया जा सकेगा। इस दौरान केंद्र को सभी मानक पूरे करने होंगे, अन्यथा अनुमति रद्द हो सकती है। रजिस्ट्रेशन समाप्त होने से 6 माह पहले नवीनीकरण आवेदन अनिवार्य होगा।

नवीनीकरण फीस 10,000 रुपये निर्धारित की गई है। सरकार ने बच्चों की सुरक्षा और विकास को ध्यान में रखते हुए विस्तृत मापदंड भी तय किए हैं। इसके तहत 20 बच्चों के लिए कम से कम 28 वर्गमीटर कक्षा होनी चाहिए। खेल क्षेत्र, शौचालय, रसोई, विश्राम कक्ष अनिवार्य रहेगा। सीसीटीवी, प्राथमिक उपचार किट, सुरक्षित पेयजल जरूरी रहेगा। दिव्यांग बच्चों के लिए रैम्प और बाधा मुक्त प्रवेश होना चाहिए। हर केंद्र में एक माह के भीतर माता-पिता शिक्षक संघ (पीटीए) का गठन होगा। इसमें 50 फीसदी अभिभावक और 50 फीसदी शिक्षक शामिल होंगे। बच्चों की सुरक्षा और विकास पर निगरानी के लिए हर तीन माह में बैठक करना अनिवार्य होगा।

आंगनबाड़ी केंद्रों से साझा करना होगा। आधार कार्ड और 3-6 वर्ष के बच्चों का शैक्षिक रिकॉर्ड भी रखना होगा। यदि केंद्र नियमों का उल्लंघन करता है तो उपायुक्त या निदेशक जांच कर सकते हैं। इसके तहत नोटिस जारी होगा और सुनवाई के बाद कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकेगा।

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